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Ayushree

मालकिन का व्यवहार शुरू में कठोर और स्वार्थी था, उन्होंने बैलों को ‘नमकहराम’ कहा। इसके विपरीत, छोटी लड़की अत्यंत दयालु और संवेदनशील थी, जिसने बैलों के कष्ट को समझा और उनकी रस्सियाँ खोलकर उन्हें जीवनदान दिया।

Ayushree

यदि मैं वह छोटी लड़की होता, तो मैं भी बैलों की पीड़ा को समझते हुए उन्हें भरपेट भोजन खिलाता। मैं उनकी रस्सियाँ खोलकर उन्हें आजाद करने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित रास्ता भी बताने की पूरी कोशिश करता।

Ayushree

हाँ, एक बार विद्यालय के प्रोजेक्ट के दौरान जब हमारी पूरी फाइल खो गई थी, तब मैंने और मेरे मित्र ने मिलकर पूरी रात काम किया। एक-दूसरे के सहयोग और प्रोत्साहन से हमने समय पर अपना कार्य पूरा किया।