हीरा और मोती को लगा कि उनके स्वामी झूरी ने उन्हें बेच दिया है। वे नए मालिक गया के प्रति वफादार नहीं थे और स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे थे, इसलिए उन्होंने काम करने से इनकार किया।
Home/गंगा पाठ्य पुस्तक का प्रथम अध्याय का समाधान (2026-27)
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हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। अत्याचार को चुपचाप सहने से अत्याचारी का मनोबल और अधिक बढ़ जाता है। न्याय और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए प्रतिकार करना हर जीवित प्राणी का नैतिक धर्म है।
मालकिन का व्यवहार शुरू में कठोर और स्वार्थी था, उन्होंने बैलों को ‘नमकहराम’ कहा। इसके विपरीत, छोटी लड़की अत्यंत दयालु और संवेदनशील थी, जिसने बैलों के कष्ट को समझा और उनकी रस्सियाँ खोलकर उन्हें जीवनदान दिया।
मेरा विचार संतुलित है। मैं हीरा के आदर्शवाद और मोती के यथार्थवादी साहस दोनों का समर्थन करता हूँ। नैतिकता (हीरा) और आत्मरक्षा (मोती) दोनों ही विषम परिस्थितियों में जीवन के संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।