हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। अत्याचार को चुपचाप सहने से अत्याचारी का मनोबल और अधिक बढ़ जाता है। न्याय और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए प्रतिकार करना हर जीवित प्राणी का नैतिक धर्म है।
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