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‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है? (क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर (ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर (ग) विवाह और अशिक्षा पर (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
सही उत्तर: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर यह विकल्प सर्वथा उपयुक्त है क्योंकि नाटककार ने पुरुष-प्रधान समाज की उस दकियानूसी सोच पर गहरा प्रहार किया है, जहाँ स्वयं उच्च शिक्षित होकर भी लोग कम पढ़ी-लिखी और दब्बू बहू की चाह रखते हैं। विवाह के समय लड़की को भेड़-बकरी या निर्जीव फर्नीचर की तरह जाँचना-परखनRead more
सही उत्तर: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
यह विकल्प सर्वथा उपयुक्त है क्योंकि नाटककार ने पुरुष-प्रधान समाज की उस दकियानूसी सोच पर गहरा प्रहार किया है, जहाँ स्वयं उच्च शिक्षित होकर भी लोग कम पढ़ी-लिखी और दब्बू बहू की चाह रखते हैं। विवाह के समय लड़की को भेड़-बकरी या निर्जीव फर्नीचर की तरह जाँचना-परखना समाज की संकीर्ण मानसिकता को दिखाता है। एकांकी ऐसी ही खोखली और अन्यायपूर्ण सामाजिक मान्यताओं की धज्जियाँ उड़ाती है।
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See lessएकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है? (क) शरीर के एक आवश्यक अंग का (ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का (घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
यह विकल्प पूरी तरह सटीक है क्योंकि एकांकी में 'रीढ़ की हड्डी' केवल शारीरिक अंग नहीं, बल्कि व्यक्तित्व की आंतरिक दृढ़ता, चारित्रिक बल और आत्म-सम्मान का सशक्त प्रतीक है। उमा अपने स्वाभिमान और सत्य के बल पर समाज के दोहरे मापदंडों का विरोध करती है। वहीं दूसरी ओर शंकर का चरित्रहीन और दब्बू होना यह सिद्धRead more
यह विकल्प पूरी तरह सटीक है क्योंकि एकांकी में ‘रीढ़ की हड्डी’ केवल शारीरिक अंग नहीं, बल्कि व्यक्तित्व की आंतरिक दृढ़ता, चारित्रिक बल और आत्म-सम्मान का सशक्त प्रतीक है। उमा अपने स्वाभिमान और सत्य के बल पर समाज के दोहरे मापदंडों का विरोध करती है। वहीं दूसरी ओर शंकर का चरित्रहीन और दब्बू होना यह सिद्ध करता है कि उसमें नैतिक रीढ़ का सर्वथा अभाव है।
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See lessलेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा? (क) विवेकानंद चट्टान से (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से (ग) पच्छिमी क्षितिज से (घ) सैंड हिल से
पाठ के अनुसार, सैंड हिल पर पहुँचने के बाद लेखक ने पाया कि अरब सागर की ओर स्थित एक ऊँचा टीला पश्चिमी क्षितिज के खुले फैलाव को रोके हुए था। सूर्यास्त को पूरे प्राकृतिक विस्तार की पृष्ठभूमि में देखने की तीव्र इच्छा के कारण लेखक सैंड हिल को छोड़कर कई कठिन टीलों को पार करते हुए आगे बढ़े। अंततः अरब सागर कRead more
पाठ के अनुसार, सैंड हिल पर पहुँचने के बाद लेखक ने पाया कि अरब सागर की ओर स्थित एक ऊँचा टीला पश्चिमी क्षितिज के खुले फैलाव को रोके हुए था। सूर्यास्त को पूरे प्राकृतिक विस्तार की पृष्ठभूमि में देखने की तीव्र इच्छा के कारण लेखक सैंड हिल को छोड़कर कई कठिन टीलों को पार करते हुए आगे बढ़े। अंततः अरब सागर की ओर वाले सबसे ऊँचे टीले पर बैठकर ही उन्होंने सूर्य के डूबने और रंगों के अद्भुत परिवर्तन का जीवंत दृश्य देखा।
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See less“मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है? (क) मौन हो जाना (ख) विस्मित हो जाना (ग) भ्रमित हो जाना (घ) आशंकित होना
यह कथन प्रकृति की असीम भव्यता के सम्मुख मनुष्य के विस्मित और आत्मविस्मृत हो जाने की स्थिति को प्रकट करता है। हिंद महासागर की गर्जना, तूफानी लहरों और क्षितिज के अंतहीन फैलाव को देखकर लेखक इतने अचंभित और मुग्ध हुए कि वे अपने सांसारिक अस्तित्व, यहाँ तक कि अपने एक यात्री होने के बोध को भी भूल गए। वे स्वRead more
यह कथन प्रकृति की असीम भव्यता के सम्मुख मनुष्य के विस्मित और आत्मविस्मृत हो जाने की स्थिति को प्रकट करता है। हिंद महासागर की गर्जना, तूफानी लहरों और क्षितिज के अंतहीन फैलाव को देखकर लेखक इतने अचंभित और मुग्ध हुए कि वे अपने सांसारिक अस्तित्व, यहाँ तक कि अपने एक यात्री होने के बोध को भी भूल गए। वे स्वयं को उस विराट प्राकृतिक दृश्य का ही एक छोटा-सा अंग मानने लगे, जो उनके गहरे विस्मय का परिचायक है।
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See less“मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है? (क) करुणा (ख) विनम्रता (ग) आत्मीयता (घ) संतुष्टि
(घ) संतुष्टि - यह विकल्प पूरी तरह उपयुक्त है क्योंकि लेखक सैंड हिल से आगे सूर्यास्त का निर्बाध दृश्य देखने के लिए लगातार ऊँचे टीले चढ़ते रहे। भारी शारीरिक थकान के बावजूद जब वे अंतिम ऊँचे टीले पर पहुँचे और क्षितिज का असीम विस्तार सामने दिखाई दिया, तो उन्हें अपने परिश्रम के सार्थक होने का बोध हुआ। 'चRead more
(घ) संतुष्टि – यह विकल्प पूरी तरह उपयुक्त है क्योंकि लेखक सैंड हिल से आगे सूर्यास्त का निर्बाध दृश्य देखने के लिए लगातार ऊँचे टीले चढ़ते रहे। भारी शारीरिक थकान के बावजूद जब वे अंतिम ऊँचे टीले पर पहुँचे और क्षितिज का असीम विस्तार सामने दिखाई दिया, तो उन्हें अपने परिश्रम के सार्थक होने का बोध हुआ। ‘चोटी सर करने’ का यह भाव किसी अहंकार का नहीं, बल्कि एक कठिन लक्ष्य को अकेले प्राप्त कर लेने के बाद मिलने वाली गहरी उपलब्धि और आत्म-संतुष्टि का परिचायक है।
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