प्रेमचंद ने हीरा और मोती के माध्यम से यह संदेश दिया है कि बिना संघर्ष के स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होती। जब बैलों को काँजीहौस में कैद किया गया, जहाँ उन्हें भूखा रखकर मरने के लिए छोड़ दिया गया था, तब उन्होंने अपनी पूरी शक्ति लगाकर दीवार तोड़ दी। इसी प्रकार, जब एक विशाल साँड़ ने उन पर हमला किया, तो उन्हRead more
प्रेमचंद ने हीरा और मोती के माध्यम से यह संदेश दिया है कि बिना संघर्ष के स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होती। जब बैलों को काँजीहौस में कैद किया गया, जहाँ उन्हें भूखा रखकर मरने के लिए छोड़ दिया गया था, तब उन्होंने अपनी पूरी शक्ति लगाकर दीवार तोड़ दी। इसी प्रकार, जब एक विशाल साँड़ ने उन पर हमला किया, तो उन्होंने भागने के बजाय एकजुट होकर उसका सामना किया। ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि जीवन में जब मान-सम्मान और अस्तित्व पर खतरा मंडराता है, तब चुपचाप सहने के बजाय साहसपूर्वक लड़ना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 1 दो बैलों की कथा समाधान – प्रश्न उत्तर, सारांश, महत्वपूर्ण प्रश्न तथा अभ्यास के प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं।
गाँव के इतिहास में यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह पशुओं की संवेदनशीलता और उनकी घर लौटने की अदम्य इच्छा को प्रकट करती है। झूरी ने जब उन्हें देखा, तो उसकी आँखों में स्नेह के आँसू थे, जो उनके बीच के गहरे आत्मिक संबंध को दर्शाते हैं। वास्तविक जीवन में भी देखा जाता है कि पालतू पशु अपने पुराने मालRead more
गाँव के इतिहास में यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह पशुओं की संवेदनशीलता और उनकी घर लौटने की अदम्य इच्छा को प्रकट करती है। झूरी ने जब उन्हें देखा, तो उसकी आँखों में स्नेह के आँसू थे, जो उनके बीच के गहरे आत्मिक संबंध को दर्शाते हैं। वास्तविक जीवन में भी देखा जाता है कि पालतू पशु अपने पुराने मालिकों को याद रखते हैं। यह घटना साधारण पलायन नहीं, बल्कि पराधीनता के विरुद्ध एक सफल संघर्ष था। बैलों का यह समर्पण और झूरी का वात्सल्य भाव इस घटना को मानवीय भावनाओं से ओत-प्रोत और अत्यंत प्रेरणादायक बनाता है।
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यदि हीरा और मोती गया के डंडे चुपचाप सहते रहते, तो वह उन पर और अधिक क्रूरता करता। जब मोती ने हल लेकर भागने और बाद में विद्रोह करने का निश्चय किया, तभी गया को उनकी शक्ति का अहसास हुआ। समाज में भी जब लोग अन्याय के विरुद्ध आवाज नहीं उठाते, तो व्यवस्था और अधिक भ्रष्ट हो जाती है। चुप रहना अत्याचारी को मौनRead more
यदि हीरा और मोती गया के डंडे चुपचाप सहते रहते, तो वह उन पर और अधिक क्रूरता करता। जब मोती ने हल लेकर भागने और बाद में विद्रोह करने का निश्चय किया, तभी गया को उनकी शक्ति का अहसास हुआ। समाज में भी जब लोग अन्याय के विरुद्ध आवाज नहीं उठाते, तो व्यवस्था और अधिक भ्रष्ट हो जाती है। चुप रहना अत्याचारी को मौन स्वीकृति देने जैसा है। इसलिए, अपनी सुरक्षा और गरिमा के लिए संघर्ष करना अनिवार्य है। हीरा-मोती का विद्रोह यह सिखाता है कि दासता की बेड़ियाँ तभी टूटती हैं जब सहने की शक्ति साहस में बदल जाती है।
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जब हीरा और मोती गया के घर पहुँचे, तो उनका मन विद्रोह से भरा हुआ था। वे झूरी के प्रति अटूट प्रेम रखते थे और उन्हें लगा कि उन्हें गया को बेचकर उनके साथ धोखा किया गया है। गया का व्यवहार भी प्रेमहीन और क्रूर था। पशु भी सम्मान और स्नेह की भाषा समझते हैं; जब उन्हें वह आत्मीयता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनीRead more
जब हीरा और मोती गया के घर पहुँचे, तो उनका मन विद्रोह से भरा हुआ था। वे झूरी के प्रति अटूट प्रेम रखते थे और उन्हें लगा कि उन्हें गया को बेचकर उनके साथ धोखा किया गया है। गया का व्यवहार भी प्रेमहीन और क्रूर था। पशु भी सम्मान और स्नेह की भाषा समझते हैं; जब उन्हें वह आत्मीयता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनी मूक भाषा में विरोध प्रकट किया। उन्होंने हल में पाँव न उठाने की कसम खा ली थी क्योंकि वे गया की अधीनता स्वीकार कर अपने स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते थे।
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यद्यपि कहानी में स्वतंत्रता का स्वर मुखर है, किंतु बैलों की मूल प्रेरणा ‘अपनापन’ ही थी। वे गया के घर से इसलिए नहीं भागे कि वे काम नहीं करना चाहते थे, बल्कि इसलिए भागे क्योंकि उन्हें वहाँ परायापन और अपमान महसूस हुआ। झूरी के पास उन्हें सूखी घास भी मिलती थी, तो वे प्रसन्न रहते थे क्योंकि वहाँ उन्हें स्Read more
यद्यपि कहानी में स्वतंत्रता का स्वर मुखर है, किंतु बैलों की मूल प्रेरणा ‘अपनापन’ ही थी। वे गया के घर से इसलिए नहीं भागे कि वे काम नहीं करना चाहते थे, बल्कि इसलिए भागे क्योंकि उन्हें वहाँ परायापन और अपमान महसूस हुआ। झूरी के पास उन्हें सूखी घास भी मिलती थी, तो वे प्रसन्न रहते थे क्योंकि वहाँ उन्हें स्नेह मिलता था। अंत में भी वे काँजीहौस से भागकर किसी जंगल में नहीं गए, बल्कि वापस झूरी के थान पर आए। इससे सिद्ध होता है कि प्रेम और अपनेपन की तलाश ही उनके संघर्ष की मुख्य शक्ति थी।
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“मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” “कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है” इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
प्रेमचंद ने हीरा और मोती के माध्यम से यह संदेश दिया है कि बिना संघर्ष के स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होती। जब बैलों को काँजीहौस में कैद किया गया, जहाँ उन्हें भूखा रखकर मरने के लिए छोड़ दिया गया था, तब उन्होंने अपनी पूरी शक्ति लगाकर दीवार तोड़ दी। इसी प्रकार, जब एक विशाल साँड़ ने उन पर हमला किया, तो उन्हRead more
प्रेमचंद ने हीरा और मोती के माध्यम से यह संदेश दिया है कि बिना संघर्ष के स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होती। जब बैलों को काँजीहौस में कैद किया गया, जहाँ उन्हें भूखा रखकर मरने के लिए छोड़ दिया गया था, तब उन्होंने अपनी पूरी शक्ति लगाकर दीवार तोड़ दी। इसी प्रकार, जब एक विशाल साँड़ ने उन पर हमला किया, तो उन्होंने भागने के बजाय एकजुट होकर उसका सामना किया। ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि जीवन में जब मान-सम्मान और अस्तित्व पर खतरा मंडराता है, तब चुपचाप सहने के बजाय साहसपूर्वक लड़ना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
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See less“गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है कैसे? (संकेत—वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
गाँव के इतिहास में यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह पशुओं की संवेदनशीलता और उनकी घर लौटने की अदम्य इच्छा को प्रकट करती है। झूरी ने जब उन्हें देखा, तो उसकी आँखों में स्नेह के आँसू थे, जो उनके बीच के गहरे आत्मिक संबंध को दर्शाते हैं। वास्तविक जीवन में भी देखा जाता है कि पालतू पशु अपने पुराने मालRead more
गाँव के इतिहास में यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह पशुओं की संवेदनशीलता और उनकी घर लौटने की अदम्य इच्छा को प्रकट करती है। झूरी ने जब उन्हें देखा, तो उसकी आँखों में स्नेह के आँसू थे, जो उनके बीच के गहरे आत्मिक संबंध को दर्शाते हैं। वास्तविक जीवन में भी देखा जाता है कि पालतू पशु अपने पुराने मालिकों को याद रखते हैं। यह घटना साधारण पलायन नहीं, बल्कि पराधीनता के विरुद्ध एक सफल संघर्ष था। बैलों का यह समर्पण और झूरी का वात्सल्य भाव इस घटना को मानवीय भावनाओं से ओत-प्रोत और अत्यंत प्रेरणादायक बनाता है।
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See less“बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी”, “अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है”- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
यदि हीरा और मोती गया के डंडे चुपचाप सहते रहते, तो वह उन पर और अधिक क्रूरता करता। जब मोती ने हल लेकर भागने और बाद में विद्रोह करने का निश्चय किया, तभी गया को उनकी शक्ति का अहसास हुआ। समाज में भी जब लोग अन्याय के विरुद्ध आवाज नहीं उठाते, तो व्यवस्था और अधिक भ्रष्ट हो जाती है। चुप रहना अत्याचारी को मौनRead more
यदि हीरा और मोती गया के डंडे चुपचाप सहते रहते, तो वह उन पर और अधिक क्रूरता करता। जब मोती ने हल लेकर भागने और बाद में विद्रोह करने का निश्चय किया, तभी गया को उनकी शक्ति का अहसास हुआ। समाज में भी जब लोग अन्याय के विरुद्ध आवाज नहीं उठाते, तो व्यवस्था और अधिक भ्रष्ट हो जाती है। चुप रहना अत्याचारी को मौन स्वीकृति देने जैसा है। इसलिए, अपनी सुरक्षा और गरिमा के लिए संघर्ष करना अनिवार्य है। हीरा-मोती का विद्रोह यह सिखाता है कि दासता की बेड़ियाँ तभी टूटती हैं जब सहने की शक्ति साहस में बदल जाती है।
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See less“दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
जब हीरा और मोती गया के घर पहुँचे, तो उनका मन विद्रोह से भरा हुआ था। वे झूरी के प्रति अटूट प्रेम रखते थे और उन्हें लगा कि उन्हें गया को बेचकर उनके साथ धोखा किया गया है। गया का व्यवहार भी प्रेमहीन और क्रूर था। पशु भी सम्मान और स्नेह की भाषा समझते हैं; जब उन्हें वह आत्मीयता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनीRead more
जब हीरा और मोती गया के घर पहुँचे, तो उनका मन विद्रोह से भरा हुआ था। वे झूरी के प्रति अटूट प्रेम रखते थे और उन्हें लगा कि उन्हें गया को बेचकर उनके साथ धोखा किया गया है। गया का व्यवहार भी प्रेमहीन और क्रूर था। पशु भी सम्मान और स्नेह की भाषा समझते हैं; जब उन्हें वह आत्मीयता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनी मूक भाषा में विरोध प्रकट किया। उन्होंने हल में पाँव न उठाने की कसम खा ली थी क्योंकि वे गया की अधीनता स्वीकार कर अपने स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते थे।
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See less“जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया….” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
यद्यपि कहानी में स्वतंत्रता का स्वर मुखर है, किंतु बैलों की मूल प्रेरणा ‘अपनापन’ ही थी। वे गया के घर से इसलिए नहीं भागे कि वे काम नहीं करना चाहते थे, बल्कि इसलिए भागे क्योंकि उन्हें वहाँ परायापन और अपमान महसूस हुआ। झूरी के पास उन्हें सूखी घास भी मिलती थी, तो वे प्रसन्न रहते थे क्योंकि वहाँ उन्हें स्Read more
यद्यपि कहानी में स्वतंत्रता का स्वर मुखर है, किंतु बैलों की मूल प्रेरणा ‘अपनापन’ ही थी। वे गया के घर से इसलिए नहीं भागे कि वे काम नहीं करना चाहते थे, बल्कि इसलिए भागे क्योंकि उन्हें वहाँ परायापन और अपमान महसूस हुआ। झूरी के पास उन्हें सूखी घास भी मिलती थी, तो वे प्रसन्न रहते थे क्योंकि वहाँ उन्हें स्नेह मिलता था। अंत में भी वे काँजीहौस से भागकर किसी जंगल में नहीं गए, बल्कि वापस झूरी के थान पर आए। इससे सिद्ध होता है कि प्रेम और अपनेपन की तलाश ही उनके संघर्ष की मुख्य शक्ति थी।
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