‘बीती विभावरी जाग री’ कविता में ‘आँखों में भरे विहाग री’ का विश्लेषण करते हुए इसके सौंदर्य को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है: व्याख्या: ‘आँखों में भरे विहाग री’ पंक्ति में ‘विहाग’ शब्द का अर्थ राग विहाग से है, जो कि एक शास्त्रीय संगीत राग है और जिसे रात्रि के अंतिम प्रहर मेंRead more
‘बीती विभावरी जाग री’ कविता में ‘आँखों में भरे विहाग री’ का विश्लेषण करते हुए इसके सौंदर्य को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है:
व्याख्या:
‘आँखों में भरे विहाग री’ पंक्ति में ‘विहाग’ शब्द का अर्थ राग विहाग से है, जो कि एक शास्त्रीय संगीत राग है और जिसे रात्रि के अंतिम प्रहर में गाया जाता है। इस संदर्भ में, यह पंक्ति नायिका की आँखों में भरे हुए उस मधुर और गहन भाव को व्यक्त करती है जो राग विहाग में होता है। यहाँ नायिका की आँखों की सुंदरता और उसकी गहराई को राग विहाग की माधुर्य और भावुकता से तुलना किया गया है।
सौंदर्य:
भावनात्मक गहराई: कवि ने नायिका की आँखों में भरे हुए भाव को राग विहाग के माध्यम से व्यक्त किया है। राग विहाग की तरह, नायिका की आँखों में भी एक गहनता और संवेदनशीलता है, जो कि अत्यंत मनमोहक और आकर्षक है।
मानवीकरण और प्रतीकात्मकता: कवि ने नायिका की आँखों की सुंदरता को संगीत से जोड़कर मानवीकरण किया है। इससे पाठक को नायिका की आँखों की सुंदरता का एक नया और गहरा अनुभव होता है। यह प्रतीकात्मकता कविता में एक अतिरिक्त सौंदर्य जोड़ती है।
मूल और ताजगी: राग विहाग का संबंध रात्रि के अंतिम प्रहर से है, जब रात समाप्त होने को होती है और सुबह का आगमन होता है। इसी प्रकार, नायिका की आँखों में भरा हुआ विहाग भी एक नई शुरुआत और ताजगी का प्रतीक है।
नायिका और प्रकृति का समन्वय: इस पंक्ति के माध्यम से, कवि ने नायिका और प्रकृति के बीच के गहरे संबंध को प्रस्तुत किया है। नायिका की आँखें और राग विहाग दोनों ही प्रकृति की सुंदरता और माधुर्य को दर्शाते हैं।
कविता का संगीतात्मक प्रभाव: ‘आँखों में भरे विहाग री’ पंक्ति में न केवल शब्दों की सुंदरता है, बल्कि इसमें एक संगीतात्मक प्रभाव भी है। यह पंक्ति पाठक को एक मधुर और सुखद ध्वनि का अनुभव कराती है, जो कि कविता के सौंदर्य को और भी बढ़ा देती है।
बीती विभावरी जाग री’ कविता का राष्ट्रीय संदर्भ में गहन अर्थ है और यह कई महत्वपूर्ण संकेत देती है। इस कविता में राष्ट्रीय पक्ष को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है: 1. अंधकार से प्रकाश की ओर प्रस्थान: कविता में ‘विभावरी’ अर्थात रात्रि का उल्लेख किया गया है, जो अंधकार का प्रतीकRead more
बीती विभावरी जाग री’ कविता का राष्ट्रीय संदर्भ में गहन अर्थ है और यह कई महत्वपूर्ण संकेत देती है। इस कविता में राष्ट्रीय पक्ष को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है:
1. अंधकार से प्रकाश की ओर प्रस्थान:
कविता में ‘विभावरी’ अर्थात रात्रि का उल्लेख किया गया है, जो अंधकार का प्रतीक है। इसका तात्पर्य है कि देश एक लंबे समय से अंधकार (गुलामी, पिछड़ापन, संघर्ष) में था, लेकिन अब वह समय बीत चुका है और नया प्रकाश (स्वतंत्रता, जागरूकता, विकास) आने वाला है।
2. नवजागरण का संदेश:
‘जाग री’ के माध्यम से कवि पूरे देश को जागने का संदेश देता है। यह एक प्रकार का आह्वान है कि देशवासी अपनी पुरानी मानसिकता और आलस्य को छोड़कर नई ऊर्जा और उत्साह के साथ जाग्रत हों और देश के नवजागरण में योगदान दें।
3. राष्ट्रीय चेतना और एकता:
कविता में जिस प्रकार विभावरी (रात्रि) को जगाने का आह्वान किया गया है, वह राष्ट्रीय चेतना और एकता का प्रतीक है। कवि सभी देशवासियों को एकजुट होकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने का संदेश देता है।
4. स्वतंत्रता की ओर अग्रसरता:
तारों के डूबने और सूर्योदय का प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि गुलामी की रात अब समाप्त हो चुकी है और स्वतंत्रता का सूरज उदय होने वाला है। यह देश की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाता है।
5. प्रकृति और संस्कृति का समन्वय:
कविता में प्रकृति के सुंदर दृश्य और नायिका का वर्णन, राष्ट्रीय संस्कृति और परंपराओं के सौंदर्य को भी उजागर करता है। यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय पुनर्जागरण केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक भी है।
6. उम्मीद और आशा:
कविता में भोर की पहली किरणों और पक्षियों के कलरव के माध्यम से कवि ने उम्मीद और आशा का संदेश दिया है। यह बताता है कि नए युग की शुरुआत हो रही है, जहां हर व्यक्ति के लिए बेहतर संभावनाएं और प्रगति के अवसर होंगे।
"बीती विभावरी जाग री" कविता में भोर के समय तारों के डूबने और पक्षियों के कलरव को लेकर कवि ने अनेक कल्पनाएँ की हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं: तारों के डूबने: आकाश में तारे रत्न थे: कवि कल्पना करता है कि आकाश में चमकते हुए तारे रत्नों की तरह थे। भोर होने के साथ ही ये रत्न धीरे-धीरे डूब जातेRead more
“बीती विभावरी जाग री” कविता में भोर के समय तारों के डूबने और पक्षियों के कलरव को लेकर कवि ने अनेक कल्पनाएँ की हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
तारों के डूबने:
आकाश में तारे रत्न थे: कवि कल्पना करता है कि आकाश में चमकते हुए तारे रत्नों की तरह थे। भोर होने के साथ ही ये रत्न धीरे-धीरे डूब जाते हैं, जैसे कोई उन्हें समेट रहा हो।
उषा तारों के घड़े डुबो रही है: कवि कल्पना करता है कि उषा, जो सौंदर्य की देवी है, आकाश रूपी पनघट में तारों से भरे घड़े को डुबो रही है। जैसे-जैसे घड़ा डूबता है, तारे भी धीरे-धीरे अदृश्य हो जाते हैं।
अंधेरे की हार हो रही है: कवि कल्पना करता है कि तारों का डूबना अंधेरे की हार का प्रतीक है। भोर होने के साथ ही प्रकाश फैलता है और अंधेरा हट जाता है।
पक्षियों के कलरव:
पक्षी मंगल गीत गा रहे हैं: कवि कल्पना करता है कि पक्षी भोर के आगमन का स्वागत करते हुए मधुर गीत गा रहे हैं। ये गीत प्रकृति के उत्साह और आनंद का प्रतीक हैं।
पक्षी उषा की स्तुति कर रहे हैं: कवि कल्पना करता है कि पक्षी उषा की सुंदरता और भव्यता की स्तुति कर रहे हैं। उनके गीत उषा के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव व्यक्त करते हैं।
प्रेम का संदेश दे रहे हैं: कवि कल्पना करता है कि पक्षियों का कलरव प्रेम का संदेश दे रहा है। उनके मधुर गीत प्रेम की मिठास और सुंदरता का प्रतीक हैं।
"बीती विभावरी जाग री" कविता में प्रकृति-चित्रण और राष्ट्रीय उद्बोधन, दोनों ही महत्वपूर्ण विषय हैं। प्रकृति-चित्रण: कविता में प्रकृति का अत्यंत सुंदर और सजीव चित्रण किया गया है। भोर के समय सूर्योदय, पक्षियों का कलरव, फूलों की सुगंध, और मंद शीतल हवा का वर्णन मनोरम है। कवि प्रकृति के विभिन्न रूपों को मRead more
“बीती विभावरी जाग री” कविता में प्रकृति-चित्रण और राष्ट्रीय उद्बोधन, दोनों ही महत्वपूर्ण विषय हैं।
प्रकृति-चित्रण:
कविता में प्रकृति का अत्यंत सुंदर और सजीव चित्रण किया गया है।
भोर के समय सूर्योदय, पक्षियों का कलरव, फूलों की सुगंध, और मंद शीतल हवा का वर्णन मनोरम है।
कवि प्रकृति के विभिन्न रूपों को मानवीय भावनाओं से जोड़कर उन्हें और भी प्रभावशाली बनाता है।
उदाहरण के लिए, वह उषा को एक युवती के रूप में कल्पना करता है जो प्रकृति को सजा रही है।
राष्ट्रीय उद्बोधन:
कवि प्रकृति के माध्यम से राष्ट्रीय जागृति का संदेश भी देता है। वह प्रेयसी को नींद से जगाकर उसे जीवन के प्रति सजग और सक्रिय होने के लिए प्रेरित करता है। कविता में कुछ ऐसे भी भाव हैं जो राष्ट्रीय भावना को जगाते हैं, जैसे:
“जगमगा उठे तन मन”
“वीर रस धारा बहने लगे”
“उठो जागृति होवे”
कौन सा प्रमुख है?
यह कहना मुश्किल है कि “बीती विभावरी जाग री” में प्रकृति-चित्रण प्रमुख है या राष्ट्रीय उद्बोधन।
कविता में दोनों विषयों का समान रूप से महत्व है।
प्रकृति-चित्रण कविता को सौंदर्य और भावपूर्णता प्रदान करता है, जबकि राष्ट्रीय उद्बोधन इसे प्रेरणादायक और प्रेरक बनाता है।
कवि का उद्देश्य केवल प्रकृति का वर्णन करना या राष्ट्रीय भावना जगाना नहीं था, बल्कि इन दोनों भावों को एक साथ मिलाकर एक ऐसा प्रभाव पैदा करना था जो पाठकों को प्रेरित करे और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करे।
दिए गए उदाहरणों में विभिन्न अलंकारों का प्रयोग हुआ है। आइए हर उदाहरण का विश्लेषण करके देखते हैं कि कौन-सा अलंकार प्रयोग किया गया है और क्यों: (क) चारु चंद्र की चंचल किरणें अलंकार: अनुप्रास अलंकार कारण: इस पंक्ति में 'च' ध्वनि का बार-बार आवृत्ति हुई है, जो अनुप्रास अलंकार की विशेषता है। अनुप्रास अलंकRead more
दिए गए उदाहरणों में विभिन्न अलंकारों का प्रयोग हुआ है। आइए हर उदाहरण का विश्लेषण करके देखते हैं कि कौन-सा अलंकार प्रयोग किया गया है और क्यों:
(क) चारु चंद्र की चंचल किरणें
अलंकार: अनुप्रास अलंकार
कारण: इस पंक्ति में ‘च’ ध्वनि का बार-बार आवृत्ति हुई है, जो अनुप्रास अलंकार की विशेषता है। अनुप्रास अलंकार में एक ही अक्षर या ध्वनि की पुनरावृत्ति होती है।
(ख) कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि
अलंकार: अनुप्रास अलंकार
कारण: इस पंक्ति में ‘क’ और ‘न’ ध्वनि की आवृत्ति हुई है, जिससे अनुप्रास अलंकार का निर्माण होता है।
(ग) चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक दिए
अलंकार: अनुप्रास अलंकार
कारण: इस पंक्ति में ‘ल’ ध्वनि की आवृत्ति हुई है, जो अनुप्रास अलंकार को दर्शाती है।
(घ) चरण कमल बंदौं हरिराई
अलंकार: रूपक अलंकार
कारण: इस पंक्ति में भगवान के चरणों को कमल के रूप में रूपक किया गया है। जब किसी वस्तु को सीधे ही दूसरी वस्तु के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे रूपक अलंकार कहते हैं।
(ङ) कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।
या खाये बौराय जग वा पाए बौराए।।
अलंकार: श्लेष अलंकार
कारण: इस पंक्ति में ‘कनक’ और ‘बौराय’ शब्दों का दो बार अलग-अलग अर्थों में उपयोग हुआ है। यह श्लेष अलंकार की विशेषता है, जहां एक ही शब्द के दो या अधिक अर्थ होते हैं।
आँखों में भरे विहाग री का विश्लेषण करते हुए इसका सौंदर्य स्पष्ट कीजिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 17
‘बीती विभावरी जाग री’ कविता में ‘आँखों में भरे विहाग री’ का विश्लेषण करते हुए इसके सौंदर्य को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है: व्याख्या: ‘आँखों में भरे विहाग री’ पंक्ति में ‘विहाग’ शब्द का अर्थ राग विहाग से है, जो कि एक शास्त्रीय संगीत राग है और जिसे रात्रि के अंतिम प्रहर मेंRead more
‘बीती विभावरी जाग री’ कविता में ‘आँखों में भरे विहाग री’ का विश्लेषण करते हुए इसके सौंदर्य को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है:
See lessव्याख्या:
‘आँखों में भरे विहाग री’ पंक्ति में ‘विहाग’ शब्द का अर्थ राग विहाग से है, जो कि एक शास्त्रीय संगीत राग है और जिसे रात्रि के अंतिम प्रहर में गाया जाता है। इस संदर्भ में, यह पंक्ति नायिका की आँखों में भरे हुए उस मधुर और गहन भाव को व्यक्त करती है जो राग विहाग में होता है। यहाँ नायिका की आँखों की सुंदरता और उसकी गहराई को राग विहाग की माधुर्य और भावुकता से तुलना किया गया है।
सौंदर्य:
भावनात्मक गहराई: कवि ने नायिका की आँखों में भरे हुए भाव को राग विहाग के माध्यम से व्यक्त किया है। राग विहाग की तरह, नायिका की आँखों में भी एक गहनता और संवेदनशीलता है, जो कि अत्यंत मनमोहक और आकर्षक है।
मानवीकरण और प्रतीकात्मकता: कवि ने नायिका की आँखों की सुंदरता को संगीत से जोड़कर मानवीकरण किया है। इससे पाठक को नायिका की आँखों की सुंदरता का एक नया और गहरा अनुभव होता है। यह प्रतीकात्मकता कविता में एक अतिरिक्त सौंदर्य जोड़ती है।
मूल और ताजगी: राग विहाग का संबंध रात्रि के अंतिम प्रहर से है, जब रात समाप्त होने को होती है और सुबह का आगमन होता है। इसी प्रकार, नायिका की आँखों में भरा हुआ विहाग भी एक नई शुरुआत और ताजगी का प्रतीक है।
नायिका और प्रकृति का समन्वय: इस पंक्ति के माध्यम से, कवि ने नायिका और प्रकृति के बीच के गहरे संबंध को प्रस्तुत किया है। नायिका की आँखें और राग विहाग दोनों ही प्रकृति की सुंदरता और माधुर्य को दर्शाते हैं।
कविता का संगीतात्मक प्रभाव: ‘आँखों में भरे विहाग री’ पंक्ति में न केवल शब्दों की सुंदरता है, बल्कि इसमें एक संगीतात्मक प्रभाव भी है। यह पंक्ति पाठक को एक मधुर और सुखद ध्वनि का अनुभव कराती है, जो कि कविता के सौंदर्य को और भी बढ़ा देती है।
प्रस्तुत कविता राष्ट्रीय संदर्भ में क्या संकेत करती है? इसके राष्ट्रीय पक्ष को प्रस्तुत कीजिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 17
बीती विभावरी जाग री’ कविता का राष्ट्रीय संदर्भ में गहन अर्थ है और यह कई महत्वपूर्ण संकेत देती है। इस कविता में राष्ट्रीय पक्ष को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है: 1. अंधकार से प्रकाश की ओर प्रस्थान: कविता में ‘विभावरी’ अर्थात रात्रि का उल्लेख किया गया है, जो अंधकार का प्रतीकRead more
बीती विभावरी जाग री’ कविता का राष्ट्रीय संदर्भ में गहन अर्थ है और यह कई महत्वपूर्ण संकेत देती है। इस कविता में राष्ट्रीय पक्ष को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है:
See less1. अंधकार से प्रकाश की ओर प्रस्थान:
कविता में ‘विभावरी’ अर्थात रात्रि का उल्लेख किया गया है, जो अंधकार का प्रतीक है। इसका तात्पर्य है कि देश एक लंबे समय से अंधकार (गुलामी, पिछड़ापन, संघर्ष) में था, लेकिन अब वह समय बीत चुका है और नया प्रकाश (स्वतंत्रता, जागरूकता, विकास) आने वाला है।
2. नवजागरण का संदेश:
‘जाग री’ के माध्यम से कवि पूरे देश को जागने का संदेश देता है। यह एक प्रकार का आह्वान है कि देशवासी अपनी पुरानी मानसिकता और आलस्य को छोड़कर नई ऊर्जा और उत्साह के साथ जाग्रत हों और देश के नवजागरण में योगदान दें।
3. राष्ट्रीय चेतना और एकता:
कविता में जिस प्रकार विभावरी (रात्रि) को जगाने का आह्वान किया गया है, वह राष्ट्रीय चेतना और एकता का प्रतीक है। कवि सभी देशवासियों को एकजुट होकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने का संदेश देता है।
4. स्वतंत्रता की ओर अग्रसरता:
तारों के डूबने और सूर्योदय का प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि गुलामी की रात अब समाप्त हो चुकी है और स्वतंत्रता का सूरज उदय होने वाला है। यह देश की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाता है।
5. प्रकृति और संस्कृति का समन्वय:
कविता में प्रकृति के सुंदर दृश्य और नायिका का वर्णन, राष्ट्रीय संस्कृति और परंपराओं के सौंदर्य को भी उजागर करता है। यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय पुनर्जागरण केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक भी है।
6. उम्मीद और आशा:
कविता में भोर की पहली किरणों और पक्षियों के कलरव के माध्यम से कवि ने उम्मीद और आशा का संदेश दिया है। यह बताता है कि नए युग की शुरुआत हो रही है, जहां हर व्यक्ति के लिए बेहतर संभावनाएं और प्रगति के अवसर होंगे।
अधखिले फूल और रस-भरी गगरी की समानता पर अपने विचार लिखिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 17
"बीती विभावरी जाग री" कविता में भोर के समय तारों के डूबने और पक्षियों के कलरव को लेकर कवि ने अनेक कल्पनाएँ की हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं: तारों के डूबने: आकाश में तारे रत्न थे: कवि कल्पना करता है कि आकाश में चमकते हुए तारे रत्नों की तरह थे। भोर होने के साथ ही ये रत्न धीरे-धीरे डूब जातेRead more
“बीती विभावरी जाग री” कविता में भोर के समय तारों के डूबने और पक्षियों के कलरव को लेकर कवि ने अनेक कल्पनाएँ की हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
See lessतारों के डूबने:
आकाश में तारे रत्न थे: कवि कल्पना करता है कि आकाश में चमकते हुए तारे रत्नों की तरह थे। भोर होने के साथ ही ये रत्न धीरे-धीरे डूब जाते हैं, जैसे कोई उन्हें समेट रहा हो।
उषा तारों के घड़े डुबो रही है: कवि कल्पना करता है कि उषा, जो सौंदर्य की देवी है, आकाश रूपी पनघट में तारों से भरे घड़े को डुबो रही है। जैसे-जैसे घड़ा डूबता है, तारे भी धीरे-धीरे अदृश्य हो जाते हैं।
अंधेरे की हार हो रही है: कवि कल्पना करता है कि तारों का डूबना अंधेरे की हार का प्रतीक है। भोर होने के साथ ही प्रकाश फैलता है और अंधेरा हट जाता है।
पक्षियों के कलरव:
पक्षी मंगल गीत गा रहे हैं: कवि कल्पना करता है कि पक्षी भोर के आगमन का स्वागत करते हुए मधुर गीत गा रहे हैं। ये गीत प्रकृति के उत्साह और आनंद का प्रतीक हैं।
पक्षी उषा की स्तुति कर रहे हैं: कवि कल्पना करता है कि पक्षी उषा की सुंदरता और भव्यता की स्तुति कर रहे हैं। उनके गीत उषा के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव व्यक्त करते हैं।
प्रेम का संदेश दे रहे हैं: कवि कल्पना करता है कि पक्षियों का कलरव प्रेम का संदेश दे रहा है। उनके मधुर गीत प्रेम की मिठास और सुंदरता का प्रतीक हैं।
इस कविता में क्या प्रमुख है- प्रकृति-चित्रण या राष्ट्रीय उद्बोधन? तर्क सहित विचार प्रस्तुत कीजिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 17
"बीती विभावरी जाग री" कविता में प्रकृति-चित्रण और राष्ट्रीय उद्बोधन, दोनों ही महत्वपूर्ण विषय हैं। प्रकृति-चित्रण: कविता में प्रकृति का अत्यंत सुंदर और सजीव चित्रण किया गया है। भोर के समय सूर्योदय, पक्षियों का कलरव, फूलों की सुगंध, और मंद शीतल हवा का वर्णन मनोरम है। कवि प्रकृति के विभिन्न रूपों को मRead more
“बीती विभावरी जाग री” कविता में प्रकृति-चित्रण और राष्ट्रीय उद्बोधन, दोनों ही महत्वपूर्ण विषय हैं।
See lessप्रकृति-चित्रण:
कविता में प्रकृति का अत्यंत सुंदर और सजीव चित्रण किया गया है।
भोर के समय सूर्योदय, पक्षियों का कलरव, फूलों की सुगंध, और मंद शीतल हवा का वर्णन मनोरम है।
कवि प्रकृति के विभिन्न रूपों को मानवीय भावनाओं से जोड़कर उन्हें और भी प्रभावशाली बनाता है।
उदाहरण के लिए, वह उषा को एक युवती के रूप में कल्पना करता है जो प्रकृति को सजा रही है।
राष्ट्रीय उद्बोधन:
कवि प्रकृति के माध्यम से राष्ट्रीय जागृति का संदेश भी देता है। वह प्रेयसी को नींद से जगाकर उसे जीवन के प्रति सजग और सक्रिय होने के लिए प्रेरित करता है। कविता में कुछ ऐसे भी भाव हैं जो राष्ट्रीय भावना को जगाते हैं, जैसे:
“जगमगा उठे तन मन”
“वीर रस धारा बहने लगे”
“उठो जागृति होवे”
कौन सा प्रमुख है?
यह कहना मुश्किल है कि “बीती विभावरी जाग री” में प्रकृति-चित्रण प्रमुख है या राष्ट्रीय उद्बोधन।
कविता में दोनों विषयों का समान रूप से महत्व है।
प्रकृति-चित्रण कविता को सौंदर्य और भावपूर्णता प्रदान करता है, जबकि राष्ट्रीय उद्बोधन इसे प्रेरणादायक और प्रेरक बनाता है।
कवि का उद्देश्य केवल प्रकृति का वर्णन करना या राष्ट्रीय भावना जगाना नहीं था, बल्कि इन दोनों भावों को एक साथ मिलाकर एक ऐसा प्रभाव पैदा करना था जो पाठकों को प्रेरित करे और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करे।
निम्नलिखित उदाहरणों में बताइए कि कौन-सा अलंकार है और क्यों? (क) चारु चंद्र की चंचल किरणें (ख) कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि (ग) चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक दिए (घ) चरण कमल बंदौं हरिराई (ङ) कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय। या खाये बौराय जग वा पाए बौराए।।
दिए गए उदाहरणों में विभिन्न अलंकारों का प्रयोग हुआ है। आइए हर उदाहरण का विश्लेषण करके देखते हैं कि कौन-सा अलंकार प्रयोग किया गया है और क्यों: (क) चारु चंद्र की चंचल किरणें अलंकार: अनुप्रास अलंकार कारण: इस पंक्ति में 'च' ध्वनि का बार-बार आवृत्ति हुई है, जो अनुप्रास अलंकार की विशेषता है। अनुप्रास अलंकRead more
दिए गए उदाहरणों में विभिन्न अलंकारों का प्रयोग हुआ है। आइए हर उदाहरण का विश्लेषण करके देखते हैं कि कौन-सा अलंकार प्रयोग किया गया है और क्यों:
See less(क) चारु चंद्र की चंचल किरणें
अलंकार: अनुप्रास अलंकार
कारण: इस पंक्ति में ‘च’ ध्वनि का बार-बार आवृत्ति हुई है, जो अनुप्रास अलंकार की विशेषता है। अनुप्रास अलंकार में एक ही अक्षर या ध्वनि की पुनरावृत्ति होती है।
(ख) कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि
अलंकार: अनुप्रास अलंकार
कारण: इस पंक्ति में ‘क’ और ‘न’ ध्वनि की आवृत्ति हुई है, जिससे अनुप्रास अलंकार का निर्माण होता है।
(ग) चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक दिए
अलंकार: अनुप्रास अलंकार
कारण: इस पंक्ति में ‘ल’ ध्वनि की आवृत्ति हुई है, जो अनुप्रास अलंकार को दर्शाती है।
(घ) चरण कमल बंदौं हरिराई
अलंकार: रूपक अलंकार
कारण: इस पंक्ति में भगवान के चरणों को कमल के रूप में रूपक किया गया है। जब किसी वस्तु को सीधे ही दूसरी वस्तु के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे रूपक अलंकार कहते हैं।
(ङ) कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।
या खाये बौराय जग वा पाए बौराए।।
अलंकार: श्लेष अलंकार
कारण: इस पंक्ति में ‘कनक’ और ‘बौराय’ शब्दों का दो बार अलग-अलग अर्थों में उपयोग हुआ है। यह श्लेष अलंकार की विशेषता है, जहां एक ही शब्द के दो या अधिक अर्थ होते हैं।