मालकिन का व्यवहार शुरू में कठोर और स्वार्थी था, उन्होंने बैलों को ‘नमकहराम’ कहा। इसके विपरीत, छोटी लड़की अत्यंत दयालु और संवेदनशील थी, जिसने बैलों के कष्ट को समझा और उनकी रस्सियाँ खोलकर उन्हें जीवनदान दिया।
“उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
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मालकिन और छोटी लड़की के व्यवहार में जमीन-आसमान का अंतर है। मालकिन बैलों को केवल काम करने वाली मशीन समझती थीं, इसलिए उनके भागकर आने पर उन्हें गुस्सा आया। इसके विपरीत, छोटी लड़की खुद माँ के वियोग का दुख झेल रही थी, इसलिए उसने बैलों की भूख और पीड़ा को अपनी पीड़ा समझा। वह उन्हें चुपके से रोटियाँ खिलाती थी। जहाँ मालकिन का दृष्टिकोण अधिकारवादी और संकीर्ण था, वहीं छोटी लड़की का व्यवहार निस्वार्थ प्रेम और करुणा पर आधारित था। हालांकि, अंत में मालकिन का हृदय भी बैलों के घर लौटने पर स्नेह से भर गया और उन्होंने उनके माथे चूम लिए।
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