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Virat

इस कथन का आशय है कि समाज में परिवर्तन निरंतर होते रहते हैं, जिससे नए दोष पैदा होते हैं। इन दोषों को मिटाने के लिए हर युग में नए सुधारों की आवश्यकता बनी रहती है।