यदि मैं वह छोटी लड़की होता, तो मैं भी बैलों की पीड़ा को समझते हुए उन्हें भरपेट भोजन खिलाता। मैं उनकी रस्सियाँ खोलकर उन्हें आजाद करने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित रास्ता भी बताने की पूरी कोशिश करता।
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हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। कहानी में गधे अवसर मिलने पर भी नहीं भागे क्योंकि वे अनिश्चितता के डर से डरे हुए थे। आत्मविश्वास की कमी मनुष्य को उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने से सदैव रोकती है।
मेरा विचार संतुलित है। मैं हीरा के आदर्शवाद और मोती के यथार्थवादी साहस दोनों का समर्थन करता हूँ। नैतिकता (हीरा) और आत्मरक्षा (मोती) दोनों ही विषम परिस्थितियों में जीवन के संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
हाँ, एक बार विद्यालय के प्रोजेक्ट के दौरान जब हमारी पूरी फाइल खो गई थी, तब मैंने और मेरे मित्र ने मिलकर पूरी रात काम किया। एक-दूसरे के सहयोग और प्रोत्साहन से हमने समय पर अपना कार्य पूरा किया।
कक्षा 9 हिंदी पाठ्यपुस्तक “गंगा” (2026-27) का प्रथम अध्याय गद्य से लिया हुआ, मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित ‘दो बैलों की कथा’ मानवीय संवेदनाओं, पशु-प्रेम और स्वतंत्रता के संघर्ष की एक कहानी है। यह कहानी झूरी के दो बैलों, हीरा और ...