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Ayushree

कहानी में हीरा-मोती ने काँजीहौस की दीवार तोड़कर अन्य जानवरों को आजाद कराया और साँड़ का मुकाबला किया। ये उदाहरण सिद्ध करते हैं कि अन्याय और मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए संघर्ष करना अनिवार्य है।

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हीरा और मोती ‘अपनापन’ की भावना से अधिक प्रेरित थे। उनके लिए स्वतंत्रता का अर्थ झूरी के सानिध्य में रहना था। जहाँ अपनापन नहीं मिला, वहीं उन्होंने विद्रोह किया और अपने पुराने घर की ओर प्रस्थान किया।

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मालकिन का व्यवहार शुरू में कठोर और स्वार्थी था, उन्होंने बैलों को ‘नमकहराम’ कहा। इसके विपरीत, छोटी लड़की अत्यंत दयालु और संवेदनशील थी, जिसने बैलों के कष्ट को समझा और उनकी रस्सियाँ खोलकर उन्हें जीवनदान दिया।