Virat
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“जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।” आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।

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प्रिय डायरी, मुझे लगता था कि छात्रावास का जीवन बहुत कठिन और नीरस होगा। दूर से वह अनुशासन की जेल जैसा दिखता था, परंतु निकट से अनुभव करने पर मुझे वहाँ मित्रता और आत्मनिर्भरता का अनूठा सुख मिला।

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  1. प्रिय डायरी, आज मुझे ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ वाली बात का विपरीत अनुभव हुआ। पहले मुझे लगता था कि हमारे शहर का नया बड़ा अस्पताल केवल एक सुंदर इमारत है जहाँ बहुत भीड़ और शोर होगा। बाहर से उसकी भव्यता और कांच की दीवारें मुझे बहुत ठंडी और औपचारिक लगती थीं। मेरा अनुमान था कि वहाँ के डॉक्टर और कर्मचारी भी मशीन की तरह रूखे होंगे।

    परंतु, जब पिछले सप्ताह मुझे अपनी छोटी बहन के इलाज के लिए वहाँ जाना पड़ा, तो मेरा अनुभव बिल्कुल बदल गया। निकट से देखने पर पाया कि वहाँ की व्यवस्था अत्यंत मानवीय और प्रेमपूर्ण थी। डॉक्टरों का व्यवहार और नर्सों की आत्मीयता ने मुझे सुरक्षा का अहसास कराया। वह स्थान केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि सेवा और करुणा का केंद्र था। वास्तव में, बिना निकट जाए हम किसी भी सत्य को पूर्णतः नहीं समझ सकते।

     

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