देखने, सुनने और अनुभव करने से लेखन में मौलिकता और सजीवता आती है। यह लेखक को किताबी ज्ञान से मुक्त कर उसके अपने दृष्टिकोण को विकसित करने में सहायता करता है, जिससे निबंध अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनता है।
मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
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मानटेन की यह पद्धति निबंध लेखन में ‘सच्ची अनुभूति’ को महत्व देती है। जब लेखक अपनी आँखों से देखी गई घटनाओं, कानों से सुनी गई बातों और स्वयं के अनुभवों को लिखता है, तो पाठक उससे जुड़ाव महसूस करते हैं। केवल कल्पना या दूसरों के विचारों के आधार पर लिखा गया निबंध नीरस हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत अनुभव उसमें प्राण फूंक देते हैं। यह प्रक्रिया लेखक की अवलोकन शक्ति को बढ़ाती है और उसे समाज को एक नए नजरिए से देखने की प्रेरणा देती है। अनुभव आधारित लेखन ही वास्तव में लेखक के व्यक्तित्व और उसके उल्लास को प्रकट करता है।
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