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Virat

प्रिय डायरी, मुझे लगता था कि छात्रावास का जीवन बहुत कठिन और नीरस होगा। दूर से वह अनुशासन की जेल जैसा दिखता था, परंतु निकट से अनुभव करने पर मुझे वहाँ मित्रता और आत्मनिर्भरता का अनूठा सुख मिला।