जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे। उन्हें किसी जीव का पिंजरे में कैद होना अनैतिक और यातनापूर्ण लगता था, इसलिए करुणावश उन्होंने मिट्ठू को स्वतंत्र करने का नैतिक निर्णय लिया। उत्तर: (घ) करुणा और नैतिकता
जगन मास्टर द्वारा मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है? (क) अनुशासन और परंपरा (ख) उदासीनता और असावधानी (ग) आत्मगौरव और विद्रोह (घ) करुणा और नैतिकता
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जगन मास्टर का मानना था कि दूसरों की स्वतंत्रता में बाधा डालना गलत है। जब उन्होंने मिट्ठू को पिंजरे में बंद देखा, तो उन्हें गहरी बेचैनी और आत्मग्लानि हुई। मिट्ठू की स्थिति उनके लिए असह्य हो गई थी। अपने सिद्धांतों के कारण उन्होंने उसे खुली हवा में आने का अवसर दिया। उनका यह कार्य जीवों के प्रति दया, करुणा और नैतिक मूल्यों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को उजागर करता है।
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