ताई को भ्रम में रखना नैतिक रूप से गलत था, लेकिन व्यावहारिक रूप से उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए उचित था। बुढ़ापे में सच का झटका उन्हें गहरा सदमा पहुँचा सकता था, जिसे वे सहन नहीं कर पातीं।
“गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्टू की ही सूरत-शकल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
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मेरे विचार से, ताई को भ्रम में रखना केवल उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा की दृष्टि से सही माना जा सकता है। ताई के लिए मिट्ठू केवल एक तोता नहीं, बल्कि उनके जीने का सहारा था। ऐसे नाजुक मोड़ पर उसे खोने का सच उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता था। हालाँकि, झूठ कभी न कभी सामने आ ही जाता है, फिर भी एक बुजुर्ग की भावनाओं की रक्षा के लिए अस्थायी रूप से यह भ्रम पैदा करना मानवीय करुणा का हिस्सा था।
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