लेखक ने बताया है कि मनुष्य अक्सर यथार्थ की कमियों के कारण वर्तमान से दुखी रहता है और जो वस्तु पहुँच से दूर होती है, उसकी कठिनाइयों को अनदेखा कर उसे सुंदर समझता है।
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निबंध के अनुसार समाज-सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। मनुष्य जाति के इतिहास में कभी ऐसा समय नहीं आया जब सुधारों की आवश्यकता न रही हो, क्योंकि जीवन में दोष सदैव उत्पन्न होते रहते हैं। सही उत्तर: (क) सुधारों ...
गार्डिनर मानते हैं कि निबंध के लिए विषय गौण है और लेखक की मानसिक स्थिति मुख्य है। लेखक भी इससे सहमत हैं, परंतु वे व्यावहारिक कठिनाई बताते हैं कि बिना विषय की स्पष्टता के लिखना कठिन होता है।
तरुण अपने भविष्य के उज्ज्वल सपनों और क्रांतिकारी बदलाव की आकांक्षा के कारण वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं। इसके विपरीत, वृद्ध अपने सुखद अतीत की यादों और गौरवशाली स्मृतियों के मोह के कारण वर्तमान को स्वीकार नहीं कर पाते।
निमिता ‘दूर के ढोल सुहावने’ और अमिता ‘समाज-सुधार’ पर निबंध लिखवाना चाहती हैं। लेखक को कठिनाई यह हुई कि उन्हें एक ही समय में दो परस्पर विरोधी और जटिल विषयों पर सीमित शब्दों में लिखना था।