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Virat

निबंध के अनुसार समाज-सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। मनुष्य जाति के इतिहास में कभी ऐसा समय नहीं आया जब सुधारों की आवश्यकता न रही हो, क्योंकि जीवन में दोष सदैव उत्पन्न होते रहते हैं। सही उत्तर: (क) सुधारों ...

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तरुण अपने भविष्य के उज्ज्वल सपनों और क्रांतिकारी बदलाव की आकांक्षा के कारण वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं। इसके विपरीत, वृद्ध अपने सुखद अतीत की यादों और गौरवशाली स्मृतियों के मोह के कारण वर्तमान को स्वीकार नहीं कर पाते।