सही उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए लेखक के सामने चुनौती थी कि उन्हें दो अलग-अलग विषयों, 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार' पर निबंध लिखना था। इस कठिनाई को हल करने के लिए उन्होंने अमीर खुसरो का उदाहरण दिया, जिन्होंने चार अलग-अलग इच्छाओं को एक ही कविता में पूराRead more
सही उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
लेखक के सामने चुनौती थी कि उन्हें दो अलग-अलग विषयों, ‘दूर के ढोल सुहावने’ और ‘समाज-सुधार’ पर निबंध लिखना था। इस कठिनाई को हल करने के लिए उन्होंने अमीर खुसरो का उदाहरण दिया, जिन्होंने चार अलग-अलग इच्छाओं को एक ही कविता में पूरा कर दिया था। लेखक इसी प्रतिभा से प्रेरणा लेकर अपनी समस्या का समाधान निकालते हैं कि वे भी एक ही निबंध के भीतर इन दोनों विपरीत विषयों का सामंजस्यपूर्ण समावेश कर अपनी लेखन प्रक्रिया पूरी करेंगे।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
ए.जी. गार्डिनर का मत है कि एक कुशल निबंधकार किसी भी साधारण विषय, जैसे 'हैट टाँगने की खूँटी' पर भी अपने भावों से उत्कृष्ट निबंध लिख सकता है। उनके लिए विषय केवल एक आधार मात्र है, असली वस्तु लेखक के हृदय का उल्लास और स्फूर्ति है। दूसरी ओर, लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी इस सिद्धांत को आदर्श तो मानते हैं,Read more
ए.जी. गार्डिनर का मत है कि एक कुशल निबंधकार किसी भी साधारण विषय, जैसे ‘हैट टाँगने की खूँटी’ पर भी अपने भावों से उत्कृष्ट निबंध लिख सकता है। उनके लिए विषय केवल एक आधार मात्र है, असली वस्तु लेखक के हृदय का उल्लास और स्फूर्ति है। दूसरी ओर, लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी इस सिद्धांत को आदर्श तो मानते हैं, किंतु व्यावहारिक धरातल पर वे इसे चुनौतीपूर्ण पाते हैं। लेखक का मानना है कि जब तक विषय की सीमाएँ और उसका स्वरूप स्पष्ट न हो, तब तक विचारों को व्यवस्थित रूप से लिपिबद्ध करना अत्यंत कठिन कार्य हो जाता है।
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तरुणों की असंतुष्टि का मुख्य कारण उनका भविष्य के प्रति उत्साह और वर्तमान व्यवस्थाओं को बदलने की तीव्र इच्छा होती है। वे एक नया आदर्श समाज गढ़ना चाहते हैं, जिसके लिए वर्तमान उन्हें बाधा प्रतीत होता है। वहीं वृद्धों की असंतुष्टि का कारण उनका अतीत के प्रति अत्यधिक मोह है। उन्हें अपना बीता हुआ समय ही सर्Read more
तरुणों की असंतुष्टि का मुख्य कारण उनका भविष्य के प्रति उत्साह और वर्तमान व्यवस्थाओं को बदलने की तीव्र इच्छा होती है। वे एक नया आदर्श समाज गढ़ना चाहते हैं, जिसके लिए वर्तमान उन्हें बाधा प्रतीत होता है। वहीं वृद्धों की असंतुष्टि का कारण उनका अतीत के प्रति अत्यधिक मोह है। उन्हें अपना बीता हुआ समय ही सर्वश्रेष्ठ लगता है और वे वर्तमान परिवर्तनों को स्वीकार करने में स्वयं को असमर्थ पाते हैं। तरुण भविष्य के स्वप्न देखते हैं और वृद्ध अतीत के गौरव में जीते हैं, इसीलिए दोनों के लिए वर्तमान सदैव कष्टकारी और असंतोषजनक बना रहता है।
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निमिता चाहती थी कि लेखक 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' जैसे कलात्मक विषय पर लिखे, जबकि अमिता चाहती थी कि वे 'समाज-सुधार' जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर विचार दें। लेखक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इन दोनों विषयों की प्रकृति एकदम भिन्न थी। एक भावप्रधान था और दूसरा समस्याप्रधान। इसके अतिरिक्त, उन्Read more
निमिता चाहती थी कि लेखक ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ जैसे कलात्मक विषय पर लिखे, जबकि अमिता चाहती थी कि वे ‘समाज-सुधार’ जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर विचार दें। लेखक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इन दोनों विषयों की प्रकृति एकदम भिन्न थी। एक भावप्रधान था और दूसरा समस्याप्रधान। इसके अतिरिक्त, उन्हें एक निश्चित समय और सीमित शब्दों के भीतर अपनी बात कहनी थी। लेखक को लगा कि बिना मानसिक एकाग्रता और उचित वातावरण के इन विषयों के साथ न्याय करना और मौलिक विचार प्रस्तुत करना अत्यंत दुष्कर कार्य है।
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निबंधशास्त्र के आचार्यों का सुझाव है कि एक आदर्श निबंध लिखने के लिए लेखक को पहले विषय से संबंधित सामग्री एकत्रित करनी चाहिए। उन्हें प्रसिद्ध विद्वानों के उद्धरणों और तर्कों का समावेश करना चाहिए ताकि निबंध प्रभावशाली लगे। भाषा शैली सरल, सुबोध और व्याकरण सम्मत होनी चाहिए। निबंध का प्रारंभ और अंत प्रभाRead more
निबंधशास्त्र के आचार्यों का सुझाव है कि एक आदर्श निबंध लिखने के लिए लेखक को पहले विषय से संबंधित सामग्री एकत्रित करनी चाहिए। उन्हें प्रसिद्ध विद्वानों के उद्धरणों और तर्कों का समावेश करना चाहिए ताकि निबंध प्रभावशाली लगे। भाषा शैली सरल, सुबोध और व्याकरण सम्मत होनी चाहिए। निबंध का प्रारंभ और अंत प्रभावशाली होना चाहिए। व्यक्तिगत रूप से, किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले मैं उस विषय से संबंधित जानकारी जुटाता हूँ, मुख्य बिंदुओं की एक सूची बनाता हूँ और फिर उन्हें एक तार्किक क्रम में व्यवस्थित कर अपने मौलिक विचारों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूँ।
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निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है? (क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए (ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए (घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
सही उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए लेखक के सामने चुनौती थी कि उन्हें दो अलग-अलग विषयों, 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार' पर निबंध लिखना था। इस कठिनाई को हल करने के लिए उन्होंने अमीर खुसरो का उदाहरण दिया, जिन्होंने चार अलग-अलग इच्छाओं को एक ही कविता में पूराRead more
सही उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
लेखक के सामने चुनौती थी कि उन्हें दो अलग-अलग विषयों, ‘दूर के ढोल सुहावने’ और ‘समाज-सुधार’ पर निबंध लिखना था। इस कठिनाई को हल करने के लिए उन्होंने अमीर खुसरो का उदाहरण दिया, जिन्होंने चार अलग-अलग इच्छाओं को एक ही कविता में पूरा कर दिया था। लेखक इसी प्रतिभा से प्रेरणा लेकर अपनी समस्या का समाधान निकालते हैं कि वे भी एक ही निबंध के भीतर इन दोनों विपरीत विषयों का सामंजस्यपूर्ण समावेश कर अपनी लेखन प्रक्रिया पूरी करेंगे।
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See lessनिबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
ए.जी. गार्डिनर का मत है कि एक कुशल निबंधकार किसी भी साधारण विषय, जैसे 'हैट टाँगने की खूँटी' पर भी अपने भावों से उत्कृष्ट निबंध लिख सकता है। उनके लिए विषय केवल एक आधार मात्र है, असली वस्तु लेखक के हृदय का उल्लास और स्फूर्ति है। दूसरी ओर, लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी इस सिद्धांत को आदर्श तो मानते हैं,Read more
ए.जी. गार्डिनर का मत है कि एक कुशल निबंधकार किसी भी साधारण विषय, जैसे ‘हैट टाँगने की खूँटी’ पर भी अपने भावों से उत्कृष्ट निबंध लिख सकता है। उनके लिए विषय केवल एक आधार मात्र है, असली वस्तु लेखक के हृदय का उल्लास और स्फूर्ति है। दूसरी ओर, लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी इस सिद्धांत को आदर्श तो मानते हैं, किंतु व्यावहारिक धरातल पर वे इसे चुनौतीपूर्ण पाते हैं। लेखक का मानना है कि जब तक विषय की सीमाएँ और उसका स्वरूप स्पष्ट न हो, तब तक विचारों को व्यवस्थित रूप से लिपिबद्ध करना अत्यंत कठिन कार्य हो जाता है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See lessलेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
तरुणों की असंतुष्टि का मुख्य कारण उनका भविष्य के प्रति उत्साह और वर्तमान व्यवस्थाओं को बदलने की तीव्र इच्छा होती है। वे एक नया आदर्श समाज गढ़ना चाहते हैं, जिसके लिए वर्तमान उन्हें बाधा प्रतीत होता है। वहीं वृद्धों की असंतुष्टि का कारण उनका अतीत के प्रति अत्यधिक मोह है। उन्हें अपना बीता हुआ समय ही सर्Read more
तरुणों की असंतुष्टि का मुख्य कारण उनका भविष्य के प्रति उत्साह और वर्तमान व्यवस्थाओं को बदलने की तीव्र इच्छा होती है। वे एक नया आदर्श समाज गढ़ना चाहते हैं, जिसके लिए वर्तमान उन्हें बाधा प्रतीत होता है। वहीं वृद्धों की असंतुष्टि का कारण उनका अतीत के प्रति अत्यधिक मोह है। उन्हें अपना बीता हुआ समय ही सर्वश्रेष्ठ लगता है और वे वर्तमान परिवर्तनों को स्वीकार करने में स्वयं को असमर्थ पाते हैं। तरुण भविष्य के स्वप्न देखते हैं और वृद्ध अतीत के गौरव में जीते हैं, इसीलिए दोनों के लिए वर्तमान सदैव कष्टकारी और असंतोषजनक बना रहता है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See lessनिमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
निमिता चाहती थी कि लेखक 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' जैसे कलात्मक विषय पर लिखे, जबकि अमिता चाहती थी कि वे 'समाज-सुधार' जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर विचार दें। लेखक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इन दोनों विषयों की प्रकृति एकदम भिन्न थी। एक भावप्रधान था और दूसरा समस्याप्रधान। इसके अतिरिक्त, उन्Read more
निमिता चाहती थी कि लेखक ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ जैसे कलात्मक विषय पर लिखे, जबकि अमिता चाहती थी कि वे ‘समाज-सुधार’ जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर विचार दें। लेखक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इन दोनों विषयों की प्रकृति एकदम भिन्न थी। एक भावप्रधान था और दूसरा समस्याप्रधान। इसके अतिरिक्त, उन्हें एक निश्चित समय और सीमित शब्दों के भीतर अपनी बात कहनी थी। लेखक को लगा कि बिना मानसिक एकाग्रता और उचित वातावरण के इन विषयों के साथ न्याय करना और मौलिक विचार प्रस्तुत करना अत्यंत दुष्कर कार्य है।
For more NCERT Solutions of Class 9 Hindi Ganga Chapter 2 क्या लिखूँ? Question Answer (2026-27)
एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See lessनिबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
निबंधशास्त्र के आचार्यों का सुझाव है कि एक आदर्श निबंध लिखने के लिए लेखक को पहले विषय से संबंधित सामग्री एकत्रित करनी चाहिए। उन्हें प्रसिद्ध विद्वानों के उद्धरणों और तर्कों का समावेश करना चाहिए ताकि निबंध प्रभावशाली लगे। भाषा शैली सरल, सुबोध और व्याकरण सम्मत होनी चाहिए। निबंध का प्रारंभ और अंत प्रभाRead more
निबंधशास्त्र के आचार्यों का सुझाव है कि एक आदर्श निबंध लिखने के लिए लेखक को पहले विषय से संबंधित सामग्री एकत्रित करनी चाहिए। उन्हें प्रसिद्ध विद्वानों के उद्धरणों और तर्कों का समावेश करना चाहिए ताकि निबंध प्रभावशाली लगे। भाषा शैली सरल, सुबोध और व्याकरण सम्मत होनी चाहिए। निबंध का प्रारंभ और अंत प्रभावशाली होना चाहिए। व्यक्तिगत रूप से, किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले मैं उस विषय से संबंधित जानकारी जुटाता हूँ, मुख्य बिंदुओं की एक सूची बनाता हूँ और फिर उन्हें एक तार्किक क्रम में व्यवस्थित कर अपने मौलिक विचारों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूँ।
For more NCERT Solutions of Class 9 Hindi Ganga Chapter 2 क्या लिखूँ? Question Answer (2026-27)
एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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