निमिता चाहती थी कि लेखक 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' जैसे कलात्मक विषय पर लिखे, जबकि अमिता चाहती थी कि वे 'समाज-सुधार' जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर विचार दें। लेखक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इन दोनों विषयों की प्रकृति एकदम भिन्न थी। एक भावप्रधान था और दूसरा समस्याप्रधान। इसके अतिरिक्त, उन्Read more
निमिता चाहती थी कि लेखक ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ जैसे कलात्मक विषय पर लिखे, जबकि अमिता चाहती थी कि वे ‘समाज-सुधार’ जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर विचार दें। लेखक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इन दोनों विषयों की प्रकृति एकदम भिन्न थी। एक भावप्रधान था और दूसरा समस्याप्रधान। इसके अतिरिक्त, उन्हें एक निश्चित समय और सीमित शब्दों के भीतर अपनी बात कहनी थी। लेखक को लगा कि बिना मानसिक एकाग्रता और उचित वातावरण के इन विषयों के साथ न्याय करना और मौलिक विचार प्रस्तुत करना अत्यंत दुष्कर कार्य है।
For more NCERT Solutions of Class 9 Hindi Ganga Chapter 2 क्या लिखूँ? Question Answer (2026-27)
एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
निबंधशास्त्र के आचार्यों का सुझाव है कि एक आदर्श निबंध लिखने के लिए लेखक को पहले विषय से संबंधित सामग्री एकत्रित करनी चाहिए। उन्हें प्रसिद्ध विद्वानों के उद्धरणों और तर्कों का समावेश करना चाहिए ताकि निबंध प्रभावशाली लगे। भाषा शैली सरल, सुबोध और व्याकरण सम्मत होनी चाहिए। निबंध का प्रारंभ और अंत प्रभाRead more
निबंधशास्त्र के आचार्यों का सुझाव है कि एक आदर्श निबंध लिखने के लिए लेखक को पहले विषय से संबंधित सामग्री एकत्रित करनी चाहिए। उन्हें प्रसिद्ध विद्वानों के उद्धरणों और तर्कों का समावेश करना चाहिए ताकि निबंध प्रभावशाली लगे। भाषा शैली सरल, सुबोध और व्याकरण सम्मत होनी चाहिए। निबंध का प्रारंभ और अंत प्रभावशाली होना चाहिए। व्यक्तिगत रूप से, किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले मैं उस विषय से संबंधित जानकारी जुटाता हूँ, मुख्य बिंदुओं की एक सूची बनाता हूँ और फिर उन्हें एक तार्किक क्रम में व्यवस्थित कर अपने मौलिक विचारों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूँ।
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हमारे इतिहास के ये महापुरुष अद्वितीय समाज सुधारक रहे हैं। गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी ने अहिंसा, करुणा और समानता का उपदेश देकर तत्कालीन कर्मकांडों और जातिवाद पर प्रहार किया। उन्होंने जीवन को सरल बनाने और आत्मज्ञान प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया। नागार्जुन ने बौद्ध दर्शन में शून्यवाद का प्रतिपादनRead more
हमारे इतिहास के ये महापुरुष अद्वितीय समाज सुधारक रहे हैं। गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी ने अहिंसा, करुणा और समानता का उपदेश देकर तत्कालीन कर्मकांडों और जातिवाद पर प्रहार किया। उन्होंने जीवन को सरल बनाने और आत्मज्ञान प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया।
नागार्जुन ने बौद्ध दर्शन में शून्यवाद का प्रतिपादन किया और विज्ञान व तर्क को बढ़ावा दिया। आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत के माध्यम से सांस्कृतिक एकता स्थापित की और चार मठों की स्थापना कर धर्म को सुव्यवस्थित किया।
मध्यकाल में कबीर और गुरु नानक देव ने धार्मिक पाखंडों और बाह्य आडंबरों का पुरजोर विरोध किया। कबीर ने अपनी साखियों के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता और निर्गुण भक्ति पर बल दिया, जबकि गुरु नानक ने ‘एक ओंकार’ का संदेश देकर लंगर जैसी प्रथा शुरू की, जिससे सामाजिक असमानता समाप्त हुई। इन सभी ने अपने समय में प्रचलित बुराइयों को जड़ से मिटाने के लिए वैचारिक क्रांति की और समाज को एक नई नैतिक दिशा दी। इनके कार्य आज भी प्रासंगिक हैं।
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मानटेन की यह पद्धति निबंध लेखन में 'सच्ची अनुभूति' को महत्व देती है। जब लेखक अपनी आँखों से देखी गई घटनाओं, कानों से सुनी गई बातों और स्वयं के अनुभवों को लिखता है, तो पाठक उससे जुड़ाव महसूस करते हैं। केवल कल्पना या दूसरों के विचारों के आधार पर लिखा गया निबंध नीरस हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत अनुभव उसमेRead more
मानटेन की यह पद्धति निबंध लेखन में ‘सच्ची अनुभूति’ को महत्व देती है। जब लेखक अपनी आँखों से देखी गई घटनाओं, कानों से सुनी गई बातों और स्वयं के अनुभवों को लिखता है, तो पाठक उससे जुड़ाव महसूस करते हैं। केवल कल्पना या दूसरों के विचारों के आधार पर लिखा गया निबंध नीरस हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत अनुभव उसमें प्राण फूंक देते हैं। यह प्रक्रिया लेखक की अवलोकन शक्ति को बढ़ाती है और उसे समाज को एक नए नजरिए से देखने की प्रेरणा देती है। अनुभव आधारित लेखन ही वास्तव में लेखक के व्यक्तित्व और उसके उल्लास को प्रकट करता है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
आज के युग में भी कई विभूतियाँ समाज को बेहतर बना रही हैं। स्त्री-शिक्षा के क्षेत्र में ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज 'नन्हीं कली' और 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियान सक्रिय हैं। मलाला यूसुफजई ने वैश्विक स्तर पर बालिकाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया है। पर्यावरण संरRead more
आज के युग में भी कई विभूतियाँ समाज को बेहतर बना रही हैं। स्त्री-शिक्षा के क्षेत्र में ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज ‘नन्हीं कली’ और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान सक्रिय हैं। मलाला यूसुफजई ने वैश्विक स्तर पर बालिकाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया है।
पर्यावरण संरक्षण में ‘पययवरण पुरुष’ सुंदरलाल बहुगुणा (चिपको आंदोलन) और जादव पायेंग, जिन्होंने अकेले पूरा जंगल खड़ा कर दिया, जैसे नाम प्रेरणादायी हैं। संस्थाओं में ‘ग्रीनपीस’ और ‘टेरी’ (TERI) महत्वपूर्ण शोध और कार्य कर रही हैं।
दिव्यांगजन और विशेष आवश्यकता वाले समूहों के लिए ‘नारायण सेवा संस्थान’ और ‘एलिम्को’ (ALIMCO) जैसी संस्थाएं कृत्रिम अंग और पुनर्वास प्रदान कर रही हैं। दीपा मलिक जैसे खिलाड़ी भी दिव्यांगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
असमानता दूर करने के लिए ‘गूंज’ और ‘स्माइल फाउंडेशन’ शिक्षा और बुनियादी जरूरतों पर काम कर रहे हैं। ये व्यक्ति और संस्थाएं साबित करते हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति से सामाजिक बदलाव संभव है और मानवता की सेवा ही सर्वोपरि धर्म है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
निमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
निमिता चाहती थी कि लेखक 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' जैसे कलात्मक विषय पर लिखे, जबकि अमिता चाहती थी कि वे 'समाज-सुधार' जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर विचार दें। लेखक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इन दोनों विषयों की प्रकृति एकदम भिन्न थी। एक भावप्रधान था और दूसरा समस्याप्रधान। इसके अतिरिक्त, उन्Read more
निमिता चाहती थी कि लेखक ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ जैसे कलात्मक विषय पर लिखे, जबकि अमिता चाहती थी कि वे ‘समाज-सुधार’ जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर विचार दें। लेखक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इन दोनों विषयों की प्रकृति एकदम भिन्न थी। एक भावप्रधान था और दूसरा समस्याप्रधान। इसके अतिरिक्त, उन्हें एक निश्चित समय और सीमित शब्दों के भीतर अपनी बात कहनी थी। लेखक को लगा कि बिना मानसिक एकाग्रता और उचित वातावरण के इन विषयों के साथ न्याय करना और मौलिक विचार प्रस्तुत करना अत्यंत दुष्कर कार्य है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See lessनिबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
निबंधशास्त्र के आचार्यों का सुझाव है कि एक आदर्श निबंध लिखने के लिए लेखक को पहले विषय से संबंधित सामग्री एकत्रित करनी चाहिए। उन्हें प्रसिद्ध विद्वानों के उद्धरणों और तर्कों का समावेश करना चाहिए ताकि निबंध प्रभावशाली लगे। भाषा शैली सरल, सुबोध और व्याकरण सम्मत होनी चाहिए। निबंध का प्रारंभ और अंत प्रभाRead more
निबंधशास्त्र के आचार्यों का सुझाव है कि एक आदर्श निबंध लिखने के लिए लेखक को पहले विषय से संबंधित सामग्री एकत्रित करनी चाहिए। उन्हें प्रसिद्ध विद्वानों के उद्धरणों और तर्कों का समावेश करना चाहिए ताकि निबंध प्रभावशाली लगे। भाषा शैली सरल, सुबोध और व्याकरण सम्मत होनी चाहिए। निबंध का प्रारंभ और अंत प्रभावशाली होना चाहिए। व्यक्तिगत रूप से, किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले मैं उस विषय से संबंधित जानकारी जुटाता हूँ, मुख्य बिंदुओं की एक सूची बनाता हूँ और फिर उन्हें एक तार्किक क्रम में व्यवस्थित कर अपने मौलिक विचारों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूँ।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See lessनिबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
हमारे इतिहास के ये महापुरुष अद्वितीय समाज सुधारक रहे हैं। गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी ने अहिंसा, करुणा और समानता का उपदेश देकर तत्कालीन कर्मकांडों और जातिवाद पर प्रहार किया। उन्होंने जीवन को सरल बनाने और आत्मज्ञान प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया। नागार्जुन ने बौद्ध दर्शन में शून्यवाद का प्रतिपादनRead more
हमारे इतिहास के ये महापुरुष अद्वितीय समाज सुधारक रहे हैं। गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी ने अहिंसा, करुणा और समानता का उपदेश देकर तत्कालीन कर्मकांडों और जातिवाद पर प्रहार किया। उन्होंने जीवन को सरल बनाने और आत्मज्ञान प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया।
नागार्जुन ने बौद्ध दर्शन में शून्यवाद का प्रतिपादन किया और विज्ञान व तर्क को बढ़ावा दिया। आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत के माध्यम से सांस्कृतिक एकता स्थापित की और चार मठों की स्थापना कर धर्म को सुव्यवस्थित किया।
मध्यकाल में कबीर और गुरु नानक देव ने धार्मिक पाखंडों और बाह्य आडंबरों का पुरजोर विरोध किया। कबीर ने अपनी साखियों के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता और निर्गुण भक्ति पर बल दिया, जबकि गुरु नानक ने ‘एक ओंकार’ का संदेश देकर लंगर जैसी प्रथा शुरू की, जिससे सामाजिक असमानता समाप्त हुई। इन सभी ने अपने समय में प्रचलित बुराइयों को जड़ से मिटाने के लिए वैचारिक क्रांति की और समाज को एक नई नैतिक दिशा दी। इनके कार्य आज भी प्रासंगिक हैं।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See lessमानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
मानटेन की यह पद्धति निबंध लेखन में 'सच्ची अनुभूति' को महत्व देती है। जब लेखक अपनी आँखों से देखी गई घटनाओं, कानों से सुनी गई बातों और स्वयं के अनुभवों को लिखता है, तो पाठक उससे जुड़ाव महसूस करते हैं। केवल कल्पना या दूसरों के विचारों के आधार पर लिखा गया निबंध नीरस हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत अनुभव उसमेRead more
मानटेन की यह पद्धति निबंध लेखन में ‘सच्ची अनुभूति’ को महत्व देती है। जब लेखक अपनी आँखों से देखी गई घटनाओं, कानों से सुनी गई बातों और स्वयं के अनुभवों को लिखता है, तो पाठक उससे जुड़ाव महसूस करते हैं। केवल कल्पना या दूसरों के विचारों के आधार पर लिखा गया निबंध नीरस हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत अनुभव उसमें प्राण फूंक देते हैं। यह प्रक्रिया लेखक की अवलोकन शक्ति को बढ़ाती है और उसे समाज को एक नए नजरिए से देखने की प्रेरणा देती है। अनुभव आधारित लेखन ही वास्तव में लेखक के व्यक्तित्व और उसके उल्लास को प्रकट करता है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See lessनिबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
आज के युग में भी कई विभूतियाँ समाज को बेहतर बना रही हैं। स्त्री-शिक्षा के क्षेत्र में ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज 'नन्हीं कली' और 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियान सक्रिय हैं। मलाला यूसुफजई ने वैश्विक स्तर पर बालिकाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया है। पर्यावरण संरRead more
आज के युग में भी कई विभूतियाँ समाज को बेहतर बना रही हैं। स्त्री-शिक्षा के क्षेत्र में ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज ‘नन्हीं कली’ और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान सक्रिय हैं। मलाला यूसुफजई ने वैश्विक स्तर पर बालिकाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया है।
पर्यावरण संरक्षण में ‘पययवरण पुरुष’ सुंदरलाल बहुगुणा (चिपको आंदोलन) और जादव पायेंग, जिन्होंने अकेले पूरा जंगल खड़ा कर दिया, जैसे नाम प्रेरणादायी हैं। संस्थाओं में ‘ग्रीनपीस’ और ‘टेरी’ (TERI) महत्वपूर्ण शोध और कार्य कर रही हैं।
दिव्यांगजन और विशेष आवश्यकता वाले समूहों के लिए ‘नारायण सेवा संस्थान’ और ‘एलिम्को’ (ALIMCO) जैसी संस्थाएं कृत्रिम अंग और पुनर्वास प्रदान कर रही हैं। दीपा मलिक जैसे खिलाड़ी भी दिव्यांगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
असमानता दूर करने के लिए ‘गूंज’ और ‘स्माइल फाउंडेशन’ शिक्षा और बुनियादी जरूरतों पर काम कर रहे हैं। ये व्यक्ति और संस्थाएं साबित करते हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति से सामाजिक बदलाव संभव है और मानवता की सेवा ही सर्वोपरि धर्म है।
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