घर केवल दीवारों से नहीं, लोगों की चहल-पहल से बनता है। ताई के बच्चे बाहर जा चुके थे, जिससे घर का रखरखाव बंद हो गया और वहाँ सन्नाटा पसर गया, इसलिए उसे खंडहर कहा गया है।
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यह शीर्षक ताई के लिए सबसे सार्थक है क्योंकि वे एक भरे-पूरे समाज के बीच रहकर भी संवाद की कमी झेल रही हैं। उनके जीवन का मौन ही इस कहानी की मुख्य संवेदना और केंद्रबिंदु है।
जगन मास्टर एक संवेदनशील, उदार और सिद्धांतों वाले व्यक्ति थे। वे पक्षियों को कैद करने के खिलाफ थे। उदाहरण के लिए, मिट्ठू की दयनीय स्थिति को देखकर उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के उसे पिंजरे से मुक्त कर दिया।
इससे पता चलता है कि ताई अब एकांतवासी नहीं रहीं। मिट्ठू की पसंद का ख्याल रखते हुए वे बाहरी दुनिया और पड़ोस के खेतों में रुचि लेने लगीं। उनके व्यक्तित्व में एक नई सक्रियता और जीवंतता आ गई।
ताई के बच्चे उनसे दूर थे और घर में बात करने वाला कोई नहीं था। जब मिट्ठू उनके एकाकी जीवन का हिस्सा बना, तो उनकी दबी हुई ममता ने मिट्ठू को ही अपना केंद्र बना लिया।