कहानी में हीरा-मोती ने काँजीहौस की दीवार तोड़कर अन्य जानवरों को आजाद कराया और साँड़ का मुकाबला किया। ये उदाहरण सिद्ध करते हैं कि अन्याय और मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए संघर्ष करना अनिवार्य है।
“मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” “कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है” इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
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प्रेमचंद ने हीरा और मोती के माध्यम से यह संदेश दिया है कि बिना संघर्ष के स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होती। जब बैलों को काँजीहौस में कैद किया गया, जहाँ उन्हें भूखा रखकर मरने के लिए छोड़ दिया गया था, तब उन्होंने अपनी पूरी शक्ति लगाकर दीवार तोड़ दी। इसी प्रकार, जब एक विशाल साँड़ ने उन पर हमला किया, तो उन्होंने भागने के बजाय एकजुट होकर उसका सामना किया। ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि जीवन में जब मान-सम्मान और अस्तित्व पर खतरा मंडराता है, तब चुपचाप सहने के बजाय साहसपूर्वक लड़ना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
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