हाँ, लंबे समय तक कैद में रहने पर प्राणी अपनी स्वाभाविक स्वतंत्रता और उड़ने की क्षमता भूल जाते हैं। वे बाहरी दुनिया के खतरों से डरने लगते हैं और पिंजरे की सुरक्षा को ही अपनी नियति मान लेते हैं।
“मिट्टू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।
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प्राणी शारीरिक और मानसिक रूप से पिंजरे के आदी हो जाते हैं क्योंकि वे सुरक्षा और भोजन के लिए मनुष्य पर निर्भर हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, हमारे पड़ोस में एक तोता कई सालों से पिंजरे में है। जब एक बार पिंजरा खुला रह गया, तो वह बाहर जाकर फिर वापस अंदर आ गया। वह खुले आसमान में जाने से डर रहा था। यह दर्शाता है कि परतंत्रता की आदत जीव की मौलिक स्वतंत्रता की प्यास को धीरे-धीरे खत्म कर देती है।
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