वर्तमान में मलाला यूसुफजई (स्त्री-शिक्षा), जादव पायेंग (पर्यावरण) और ‘हेल्पेज इंडिया’ जैसी संस्थाएं समाज के वंचित वर्गों के उत्थान हेतु कार्य कर रही हैं। ये दिव्यांगों के सशक्तीकरण और प्रकृति संरक्षण के लिए निरंतर समर्पित हैं।
निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
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आज के युग में भी कई विभूतियाँ समाज को बेहतर बना रही हैं। स्त्री-शिक्षा के क्षेत्र में ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज ‘नन्हीं कली’ और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान सक्रिय हैं। मलाला यूसुफजई ने वैश्विक स्तर पर बालिकाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया है।
पर्यावरण संरक्षण में ‘पययवरण पुरुष’ सुंदरलाल बहुगुणा (चिपको आंदोलन) और जादव पायेंग, जिन्होंने अकेले पूरा जंगल खड़ा कर दिया, जैसे नाम प्रेरणादायी हैं। संस्थाओं में ‘ग्रीनपीस’ और ‘टेरी’ (TERI) महत्वपूर्ण शोध और कार्य कर रही हैं।
दिव्यांगजन और विशेष आवश्यकता वाले समूहों के लिए ‘नारायण सेवा संस्थान’ और ‘एलिम्को’ (ALIMCO) जैसी संस्थाएं कृत्रिम अंग और पुनर्वास प्रदान कर रही हैं। दीपा मलिक जैसे खिलाड़ी भी दिव्यांगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
असमानता दूर करने के लिए ‘गूंज’ और ‘स्माइल फाउंडेशन’ शिक्षा और बुनियादी जरूरतों पर काम कर रहे हैं। ये व्यक्ति और संस्थाएं साबित करते हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति से सामाजिक बदलाव संभव है और मानवता की सेवा ही सर्वोपरि धर्म है।
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