हमारे यहाँ सावन मेले में चारों ओर हरियाली और फूलों की खुशबू होती है। ढोल-नगाड़ों का शोर, गर्मागर्म जलेबियों का स्वाद और लोगों की भारी भीड़ श्रद्धा और आनंद का अद्भुत वातावरण निर्मित करती है।
आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाजें, रंग, गंध, खान-पान, दृश्य और भाव होंगे? (संकेत- उनका वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों – देखने, सुनने, सूँघने, छूने और स्वाद महसूस करने के आधार पर कीजिए।)
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मेले का दृश्य रंग-बिरंगी लाइटों और झूलों से जगमगाता है। कानों में पीं-पीं की आवाज़ें और भजनों का शोर गूँजता है, जबकि नाक में तलते हुए मालपुओं और ताजी मिट्ठी की गंध भर जाती है। हाथों से रेशमी चूड़ियाँ छूना और ठंडी कुल्फी का स्वाद लेना एक जादुई अनुभव होता है। लोगों की भीड़ के बीच पसीने और अगरबत्ती की मिली-जुली महक के साथ अपार श्रद्धा का भाव हर व्यक्ति के चेहरे पर साफ झलकता है।
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