ताई यहाँ अपने अकेलेपन से भरे जीवन के अंतिम पड़ाव की नैया की बात कर रही हैं। घर में कोई सदस्य न होने और संवादहीनता के कारण वे भविष्य की असुरक्षा को लेकर यह कह रही हैं।
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