इन पंक्तियों का आशय है कि जो लोग सीमित संसाधनों या साधनों के साथ बहुत बड़े और कठिन कार्य करने के लिए निकल पड़ते हैं। यहाँ "छोटी-सी नैया" (छोटी नाव) उनके सीमित साधनों का प्रतीक है, और "उदधि पार" (समुद्र पार करना) उस बड़े और कठिन लक्ष्य का प्रतीक है जिसे वे हासिल करना चाहते हैं। इसका विस्तार से अर्थ यRead more
इन पंक्तियों का आशय है कि जो लोग सीमित संसाधनों या साधनों के साथ बहुत बड़े और कठिन कार्य करने के लिए निकल पड़ते हैं। यहाँ “छोटी-सी नैया” (छोटी नाव) उनके सीमित साधनों का प्रतीक है, और “उदधि पार” (समुद्र पार करना) उस बड़े और कठिन लक्ष्य का प्रतीक है जिसे वे हासिल करना चाहते हैं।
इसका विस्तार से अर्थ यह हो सकता है कि साधनों की कमी या कठिनाइयों के बावजूद, जो व्यक्ति दृढ़ संकल्प और साहस के साथ बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रयास करते हैं, वे वास्तव में प्रशंसनीय हैं। उनका साहस, आत्मविश्वास और प्रयास ही उन्हें उनके उद्देश्य तक पहुँचाता है, भले ही उनका प्रारंभिक साधन कितना भी छोटा या साधारण क्यों न हो।
पंक्ति "जिनकी धुन का कर दिया अंत" से कवि का आशय है उन लोगों से है जिनके उत्साह, समर्पण, या जज़्बे को किसी कारणवश समाप्त कर दिया गया है। यहाँ "धुन" का मतलब है किसी काम के प्रति गहरी लगन, प्रेरणा या उत्साह, और "अंत कर दिया" का मतलब है उस लगन या उत्साह को खत्म कर देना। इसका आशय यह हो सकता है कि वे लोगRead more
पंक्ति “जिनकी धुन का कर दिया अंत” से कवि का आशय है उन लोगों से है जिनके उत्साह, समर्पण, या जज़्बे को किसी कारणवश समाप्त कर दिया गया है। यहाँ “धुन” का मतलब है किसी काम के प्रति गहरी लगन, प्रेरणा या उत्साह, और “अंत कर दिया” का मतलब है उस लगन या उत्साह को खत्म कर देना।
इसका आशय यह हो सकता है कि वे लोग जो अपने लक्ष्य या सपनों को पाने के लिए पूरी तरह समर्पित थे, उनके उत्साह या प्रेरणा को किसी बाहरी बाधा, निराशा या असफलता के कारण समाप्त कर दिया गया। यह पंक्ति उन कठिनाइयों और संघर्षों को दर्शाती है जो किसी व्यक्ति की धुन को समाप्त कर सकती हैं।
यदि देशभक्त अपना बलिदान न देते तो आज हमारी स्थिति अत्यंत भिन्न होती। उनके बलिदान ने हमारे राष्ट्र को स्वतंत्रता, स्वाभिमान, और प्रगति का मार्ग दिखाया। इस विचार को तर्क सहित निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है: स्वतंत्रता का अभाव: अगर देशभक्तों ने अपने जीवन का बलिदान नहीं दिया होता, तो हमRead more
यदि देशभक्त अपना बलिदान न देते तो आज हमारी स्थिति अत्यंत भिन्न होती। उनके बलिदान ने हमारे राष्ट्र को स्वतंत्रता, स्वाभिमान, और प्रगति का मार्ग दिखाया। इस विचार को तर्क सहित निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
स्वतंत्रता का अभाव: अगर देशभक्तों ने अपने जीवन का बलिदान नहीं दिया होता, तो हमारा देश आज भी विदेशी शासन के अधीन होता। वे बलिदानी ही थे जिन्होंने हमें स्वतंत्रता की नींव प्रदान की। बिना उनके संघर्ष के, हम आज भी परतंत्रता के बंधनों में जकड़े होते।
राष्ट्रीय पहचान: देशभक्तों के बलिदान ने हमें एक राष्ट्रीय पहचान दी। अगर उन्होंने अपना बलिदान नहीं दिया होता, तो हम सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से विभाजित और कमजोर होते। उनकी त्याग और संघर्ष ने हमें एकजुट किया और एक मजबूत राष्ट्रीय भावना का निर्माण किया।
संवैधानिक अधिकार: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्तों के बलिदान ने हमें हमारे मौलिक अधिकार दिलाए। अगर उनका बलिदान नहीं होता, तो हमारे पास समानता, स्वतंत्रता और न्याय जैसे अधिकार नहीं होते। इन अधिकारों के बिना हम एक सशक्त और स्वतंत्र समाज का निर्माण नहीं कर पाते।
आर्थिक प्रगति: देशभक्तों के बलिदान ने हमें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। यदि वे अपना बलिदान नहीं देते, तो हमारा आर्थिक विकास बहुत सीमित होता और हम आज भी आर्थिक रूप से पिछड़े होते। उनका संघर्ष हमें आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की दिशा में अग्रसर करता है।
संस्कृति और धरोहर: देशभक्तों का बलिदान हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। अगर उन्होंने अपने जीवन का बलिदान नहीं दिया होता, तो हमारी संस्कृति और इतिहास भी प्रभावित होते। उनकी कहानियाँ और संघर्ष हमारी पीढ़ियों को प्रेरणा देते हैं और हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखते हैं।
प्रेरणा और आदर्श: देशभक्तों के बलिदान ने हमें प्रेरणा और आदर्श दिए। यदि उनका बलिदान नहीं होता, तो हमारे पास साहस, समर्पण और देशप्रेम के उदाहरण नहीं होते। ये उदाहरण हमें कठिनाइयों से लड़ने और अपने देश के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देते हैं।
प्रतिकूल परिस्थिति ने जिनके कर दिए मनोरथ चूर-चूर का आशय है- NIOS Class 10 Hindi Chapter 20
(क) ‘प्रतिकूल परिस्थिति ने जिनके कर दिए मनोरथ चूर-चूर’ का आशय है- विपरीत परिस्थितियों ने कामनाओं को पूरा नहीं होने दिया।
(क) ‘प्रतिकूल परिस्थिति ने जिनके कर दिए मनोरथ चूर-चूर’ का आशय है- विपरीत परिस्थितियों ने कामनाओं को पूरा नहीं होने दिया।
See lessसपने देखना कब सार्थक है? NIOS Class 10 Hindi Chapter 20
(ग) सपने देखना सार्थक है जब उनके लिए प्रयास किए जाएँ।
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See lessजो छोटी-सी नैया लेकर उतरे करने को उदधि पार, इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 20
इन पंक्तियों का आशय है कि जो लोग सीमित संसाधनों या साधनों के साथ बहुत बड़े और कठिन कार्य करने के लिए निकल पड़ते हैं। यहाँ "छोटी-सी नैया" (छोटी नाव) उनके सीमित साधनों का प्रतीक है, और "उदधि पार" (समुद्र पार करना) उस बड़े और कठिन लक्ष्य का प्रतीक है जिसे वे हासिल करना चाहते हैं। इसका विस्तार से अर्थ यRead more
इन पंक्तियों का आशय है कि जो लोग सीमित संसाधनों या साधनों के साथ बहुत बड़े और कठिन कार्य करने के लिए निकल पड़ते हैं। यहाँ “छोटी-सी नैया” (छोटी नाव) उनके सीमित साधनों का प्रतीक है, और “उदधि पार” (समुद्र पार करना) उस बड़े और कठिन लक्ष्य का प्रतीक है जिसे वे हासिल करना चाहते हैं।
See lessइसका विस्तार से अर्थ यह हो सकता है कि साधनों की कमी या कठिनाइयों के बावजूद, जो व्यक्ति दृढ़ संकल्प और साहस के साथ बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रयास करते हैं, वे वास्तव में प्रशंसनीय हैं। उनका साहस, आत्मविश्वास और प्रयास ही उन्हें उनके उद्देश्य तक पहुँचाता है, भले ही उनका प्रारंभिक साधन कितना भी छोटा या साधारण क्यों न हो।
जिनकी धुन का कर दिया अंत से कवि का क्या आशय है? NIOS Class 10 Hindi Chapter 20
पंक्ति "जिनकी धुन का कर दिया अंत" से कवि का आशय है उन लोगों से है जिनके उत्साह, समर्पण, या जज़्बे को किसी कारणवश समाप्त कर दिया गया है। यहाँ "धुन" का मतलब है किसी काम के प्रति गहरी लगन, प्रेरणा या उत्साह, और "अंत कर दिया" का मतलब है उस लगन या उत्साह को खत्म कर देना। इसका आशय यह हो सकता है कि वे लोगRead more
पंक्ति “जिनकी धुन का कर दिया अंत” से कवि का आशय है उन लोगों से है जिनके उत्साह, समर्पण, या जज़्बे को किसी कारणवश समाप्त कर दिया गया है। यहाँ “धुन” का मतलब है किसी काम के प्रति गहरी लगन, प्रेरणा या उत्साह, और “अंत कर दिया” का मतलब है उस लगन या उत्साह को खत्म कर देना।
See lessइसका आशय यह हो सकता है कि वे लोग जो अपने लक्ष्य या सपनों को पाने के लिए पूरी तरह समर्पित थे, उनके उत्साह या प्रेरणा को किसी बाहरी बाधा, निराशा या असफलता के कारण समाप्त कर दिया गया। यह पंक्ति उन कठिनाइयों और संघर्षों को दर्शाती है जो किसी व्यक्ति की धुन को समाप्त कर सकती हैं।
यदि देशभक्त अपना बलिदान न देते तो आज हमारी क्या स्थिति होती? तर्क सहित लिखिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 20
यदि देशभक्त अपना बलिदान न देते तो आज हमारी स्थिति अत्यंत भिन्न होती। उनके बलिदान ने हमारे राष्ट्र को स्वतंत्रता, स्वाभिमान, और प्रगति का मार्ग दिखाया। इस विचार को तर्क सहित निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है: स्वतंत्रता का अभाव: अगर देशभक्तों ने अपने जीवन का बलिदान नहीं दिया होता, तो हमRead more
यदि देशभक्त अपना बलिदान न देते तो आज हमारी स्थिति अत्यंत भिन्न होती। उनके बलिदान ने हमारे राष्ट्र को स्वतंत्रता, स्वाभिमान, और प्रगति का मार्ग दिखाया। इस विचार को तर्क सहित निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
See lessस्वतंत्रता का अभाव: अगर देशभक्तों ने अपने जीवन का बलिदान नहीं दिया होता, तो हमारा देश आज भी विदेशी शासन के अधीन होता। वे बलिदानी ही थे जिन्होंने हमें स्वतंत्रता की नींव प्रदान की। बिना उनके संघर्ष के, हम आज भी परतंत्रता के बंधनों में जकड़े होते।
राष्ट्रीय पहचान: देशभक्तों के बलिदान ने हमें एक राष्ट्रीय पहचान दी। अगर उन्होंने अपना बलिदान नहीं दिया होता, तो हम सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से विभाजित और कमजोर होते। उनकी त्याग और संघर्ष ने हमें एकजुट किया और एक मजबूत राष्ट्रीय भावना का निर्माण किया।
संवैधानिक अधिकार: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्तों के बलिदान ने हमें हमारे मौलिक अधिकार दिलाए। अगर उनका बलिदान नहीं होता, तो हमारे पास समानता, स्वतंत्रता और न्याय जैसे अधिकार नहीं होते। इन अधिकारों के बिना हम एक सशक्त और स्वतंत्र समाज का निर्माण नहीं कर पाते।
आर्थिक प्रगति: देशभक्तों के बलिदान ने हमें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। यदि वे अपना बलिदान नहीं देते, तो हमारा आर्थिक विकास बहुत सीमित होता और हम आज भी आर्थिक रूप से पिछड़े होते। उनका संघर्ष हमें आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की दिशा में अग्रसर करता है।
संस्कृति और धरोहर: देशभक्तों का बलिदान हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। अगर उन्होंने अपने जीवन का बलिदान नहीं दिया होता, तो हमारी संस्कृति और इतिहास भी प्रभावित होते। उनकी कहानियाँ और संघर्ष हमारी पीढ़ियों को प्रेरणा देते हैं और हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखते हैं।
प्रेरणा और आदर्श: देशभक्तों के बलिदान ने हमें प्रेरणा और आदर्श दिए। यदि उनका बलिदान नहीं होता, तो हमारे पास साहस, समर्पण और देशप्रेम के उदाहरण नहीं होते। ये उदाहरण हमें कठिनाइयों से लड़ने और अपने देश के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देते हैं।