निबंध के अनुसार समाज-सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। मनुष्य जाति के इतिहास में कभी ऐसा समय नहीं आया जब सुधारों की आवश्यकता न रही हो, क्योंकि जीवन में दोष सदैव उत्पन्न होते रहते हैं। सही उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है? (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है। (ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं। (ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं। (घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
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सही उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
लेखक के अनुसार वर्तमान काल सदैव सुधारों का काल बना रहता है। जीवन की प्रगति के साथ-साथ नए-नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं, जिन्हें दूर करने के लिए नए सुधारों की आवश्यकता पड़ती है। आश्चर्य की बात यह है कि जो विचार कभी सुधार माने जाते थे, वे समय के साथ स्वयं दोष बन जाते हैं और फिर से उनके नव-सुधार की जरूरत होती है। अतः न तो दोषों का कभी अंत होता है और न ही सुधारों की शाश्वत आवश्यकता का।
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