Ayushree
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“दोनों गधे अभी तक क्यों-के-क्यों खड़े थे” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।

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हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। कहानी में गधे अवसर मिलने पर भी नहीं भागे क्योंकि वे अनिश्चितता के डर से डरे हुए थे। आत्मविश्वास की कमी मनुष्य को उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने से सदैव रोकती है।

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  1. काँजीहौस की दीवार टूटने के बाद सभी जानवर भाग गए, लेकिन दो गधे वहीं खड़े रहे। उन्हें डर था कि भागने के बाद अगर पकड़े गए तो क्या होगा। यह स्थिति जीवन की वास्तविकता को दर्शाती है। कई बार हम जीवन में बड़े बदलाव या स्वतंत्रता का अवसर पाते हैं, लेकिन ‘क्या होगा’ के भय और पुराने ढर्रे के संकोच के कारण कदम पीछे खींच लेते हैं। मेरे अनुभव में, परीक्षा या साक्षात्कार के समय भी लोग योग्यता होने के बावजूद घबराहट के कारण असफल हो जाते हैं। सफल वही होता है जो भय को त्यागकर साहस के साथ अवसर का आलिंगन करता है।

     

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