हीरा और मोती ‘अपनापन’ की भावना से अधिक प्रेरित थे। उनके लिए स्वतंत्रता का अर्थ झूरी के सानिध्य में रहना था। जहाँ अपनापन नहीं मिला, वहीं उन्होंने विद्रोह किया और अपने पुराने घर की ओर प्रस्थान किया।
“जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया….” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
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यद्यपि कहानी में स्वतंत्रता का स्वर मुखर है, किंतु बैलों की मूल प्रेरणा ‘अपनापन’ ही थी। वे गया के घर से इसलिए नहीं भागे कि वे काम नहीं करना चाहते थे, बल्कि इसलिए भागे क्योंकि उन्हें वहाँ परायापन और अपमान महसूस हुआ। झूरी के पास उन्हें सूखी घास भी मिलती थी, तो वे प्रसन्न रहते थे क्योंकि वहाँ उन्हें स्नेह मिलता था। अंत में भी वे काँजीहौस से भागकर किसी जंगल में नहीं गए, बल्कि वापस झूरी के थान पर आए। इससे सिद्ध होता है कि प्रेम और अपनेपन की तलाश ही उनके संघर्ष की मुख्य शक्ति थी।
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