इन महापुरुषों ने समाज में व्याप्त कुरीतियों, भेदभाव और अंधविश्वासों को समाप्त कर मानवता, अहिंसा और प्रेम का मार्ग दिखाया। उन्होंने ऊंच-नीच के बंधनों को तोड़कर ज्ञान और अध्यात्म के माध्यम से समाज को नई दृष्टि प्रदान की।
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वर्तमान में मलाला यूसुफजई (स्त्री-शिक्षा), जादव पायेंग (पर्यावरण) और ‘हेल्पेज इंडिया’ जैसी संस्थाएं समाज के वंचित वर्गों के उत्थान हेतु कार्य कर रही हैं। ये दिव्यांगों के सशक्तीकरण और प्रकृति संरक्षण के लिए निरंतर समर्पित हैं।
अवसर मिलने पर मैं शिक्षा का सार्वभौमिकरण, दहेज प्रथा का अंत और कचरा प्रबंधन पर मुख्य ध्यान दूँगा। मैं जागरूकता अभियानों, सामुदायिक भागीदारी और तकनीक के उपयोग के माध्यम से इन सामाजिक कुरीतियों को जड़ से मिटाना चाहूँगा।
भारतीय साहित्य ‘धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष’ के माध्यम से संतुलित जीवन का संदेश देता है। यह सिखाता है कि व्यक्ति को अपने सांसारिक कर्तव्यों को निभाते हुए आत्मिक शांति और नैतिक मूल्यों का त्याग नहीं करना चाहिए।
जैविक खाद बनाना ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ वाली बात है। इसमें हम रसोई के कचरे से मूल्यवान खाद बनाकर दोहरा लाभ उठाते हैं। इससे प्रदूषण भी कम होता है और पौधों को पोषण भी मिलता है।