जैविक खाद बनाना ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ वाली बात है। इसमें हम रसोई के कचरे से मूल्यवान खाद बनाकर दोहरा लाभ उठाते हैं। इससे प्रदूषण भी कम होता है और पौधों को पोषण भी मिलता है।
Home/'गंगा' का दूसरा अध्याय समाधान – क्या लिखूँ के लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी