ताई गाँव के साथियों के साथ रेलगाड़ी द्वारा प्रयागराज गई होंगी। उन्होंने साधारण श्रेणी का टिकट लेकर सफर किया होगा और रास्ते में घर से ले जाया गया पूड़ी-अचार खाकर धर्मशाला में निवास किया होगा।
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