यहाँ बिना डाँट-मार के केवल गंभीर दृष्टि से बच्चों को गलती का अहसास कराया जाता था। यह अनुशासन भय पर नहीं, बल्कि पिता के प्रति गहरे आदर और स्नेहपूर्ण समझ पर आधारित था। हिंदी गंगा Chapter 4 ऐसी भी बातें होती ...
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