जगन मास्टर एक संवेदनशील, उदार और सिद्धांतों वाले व्यक्ति थे। वे पक्षियों को कैद करने के खिलाफ थे। उदाहरण के लिए, मिट्ठू की दयनीय स्थिति को देखकर उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के उसे पिंजरे से मुक्त कर दिया।
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इससे पता चलता है कि ताई अब एकांतवासी नहीं रहीं। मिट्ठू की पसंद का ख्याल रखते हुए वे बाहरी दुनिया और पड़ोस के खेतों में रुचि लेने लगीं। उनके व्यक्तित्व में एक नई सक्रियता और जीवंतता आ गई।
ताई के बच्चे उनसे दूर थे और घर में बात करने वाला कोई नहीं था। जब मिट्ठू उनके एकाकी जीवन का हिस्सा बना, तो उनकी दबी हुई ममता ने मिट्ठू को ही अपना केंद्र बना लिया।
इस वाक्य में ताई के परिवार की गिरती आर्थिक स्थिति और ज़मीन-जायदाद के बिक जाने की ओर संकेत किया गया है। पुराने संपन्न दिनों के वैभव का समाप्त होकर दूसरों के नियंत्रण में चले जाना ही इसका अर्थ है।
ताई यहाँ अपने अकेलेपन से भरे जीवन के अंतिम पड़ाव की नैया की बात कर रही हैं। घर में कोई सदस्य न होने और संवादहीनता के कारण वे भविष्य की असुरक्षा को लेकर यह कह रही हैं।