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‘आदर्श निबंध’ और ‘व्यक्तिगत निबंध’ के बीच के द्वंद्व को लेखक ने किस प्रकार स्पष्ट किया है?
लेखक ने निबंध लेखन की दो धाराओं के बीच के अंतर को बहुत बारीकी से समझाया है। एक ओर निबंधशास्त्र के आचार्य हैं जो मानते हैं कि एक अच्छे निबंध के लिए विषय का गहन ज्ञान, सामग्री का क्रमबद्ध संकलन और प्रभावशाली भाषा अनिवार्य है। यह एक शास्त्रीय और अनुशासित तरीका है। दूसरी ओर, मानटेन जैसी शैली है जहाँ नियRead more
लेखक ने निबंध लेखन की दो धाराओं के बीच के अंतर को बहुत बारीकी से समझाया है। एक ओर निबंधशास्त्र के आचार्य हैं जो मानते हैं कि एक अच्छे निबंध के लिए विषय का गहन ज्ञान, सामग्री का क्रमबद्ध संकलन और प्रभावशाली भाषा अनिवार्य है। यह एक शास्त्रीय और अनुशासित तरीका है। दूसरी ओर, मानटेन जैसी शैली है जहाँ नियम गौण हो जाते हैं और लेखक का अपना व्यक्तित्व प्रधान हो जाता है। लेखक का मानना है कि वास्तविक निबंध वही है जिसमें औपचारिकता के बजाय आत्मिक सुख और मानसिक स्फूर्ति हो। आदर्श निबंध जहाँ मस्तिष्क की कसरत है, वहीं व्यक्तिगत निबंध हृदय का उल्लास है। इन दोनों शैलियों का समन्वय ही निबंध लेखन की असली चुनौती है।
For more NCERT Solutions of Class 9 Hindi Ganga Chapter 2 क्या लिखूँ? Question Answer (2026-27)
एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
https://hindi.tiwariacademy.com/ncert-solutions/class-9/hindi/ganga-chapter-2/
See less“वर्तमान काल सदैव सुधारों का काल बना रहता है” – लेखक के इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
लेखक का मानना है कि समाज कभी भी पूर्णतः दोषमुक्त नहीं हो सकता। विकास की प्रक्रिया में पुरानी परंपराएं समय के साथ अप्रासंगिक हो जाती हैं और नए सामाजिक दोष जन्म ले लेते हैं। जो विचार कल तक 'सुधार' माने जाते थे, वे आज की परिस्थितियों में 'दोष' बन सकते हैं। इसलिए, समाज को बेहतर बनाने की प्रक्रिया कभी रुRead more
लेखक का मानना है कि समाज कभी भी पूर्णतः दोषमुक्त नहीं हो सकता। विकास की प्रक्रिया में पुरानी परंपराएं समय के साथ अप्रासंगिक हो जाती हैं और नए सामाजिक दोष जन्म ले लेते हैं। जो विचार कल तक ‘सुधार’ माने जाते थे, वे आज की परिस्थितियों में ‘दोष’ बन सकते हैं। इसलिए, समाज को बेहतर बनाने की प्रक्रिया कभी रुकती नहीं है। हर नई पीढ़ी अपने समय की समस्याओं को देखती है और उन्हें सुधारने का प्रयास करती है। इसीलिए लेखक कहते हैं कि सुधारों का कोई अंत नहीं है; यह एक निरंतर चलने वाला चक्र है जहाँ वर्तमान हमेशा खुद को सुधारने और नए आदर्श स्थापित करने में व्यस्त रहता है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See lessलेखक ने ‘दूर के ढोल सुहावने’ लोकोक्ति के माध्यम से मानवीय मनोविज्ञान के किस सत्य को उजागर किया है?
लेखक के अनुसार, 'दूर के ढोल सुहावने' केवल एक कहावत नहीं बल्कि मानव मन की एक गहरी प्रवृत्ति है। जब हम किसी वस्तु के निकट होते हैं, तो उसकी कमियां और कर्कशता हमें परेशान करती है, जैसे ढोल के पास बैठे व्यक्ति को उसका शोर सुनाई देता है। लेकिन दूर बैठे व्यक्ति को केवल उसकी गूँज और मधुरता का अनुभव होता हैRead more
लेखक के अनुसार, ‘दूर के ढोल सुहावने’ केवल एक कहावत नहीं बल्कि मानव मन की एक गहरी प्रवृत्ति है। जब हम किसी वस्तु के निकट होते हैं, तो उसकी कमियां और कर्कशता हमें परेशान करती है, जैसे ढोल के पास बैठे व्यक्ति को उसका शोर सुनाई देता है। लेकिन दूर बैठे व्यक्ति को केवल उसकी गूँज और मधुरता का अनुभव होता है। इसी तरह, हम अपने वर्तमान की समस्याओं से इतने घिरे होते हैं कि हमें अपना अतीत या भविष्य अधिक सुखद लगता है। यह मनोवैज्ञानिक सत्य है कि दूरी दोषों को छिपा देती है और केवल सुंदरता को उभारती है, जिससे मनुष्य हमेशा उस सुख की कामना करता है जो उसके पास वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See less“हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है? (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना (ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना (ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना (घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
सही उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना निबंधकार यह तर्क देते हैं कि निबंध लेखन के लिए कोई विशेष विषय अनिवार्य नहीं है। जिस प्रकार हैट टाँगने के लिए खूँटी मात्र एक साधन है, उसी प्रकार विषय केवल आधार है। वास्तविक महत्व लेखक की मानसिक स्थिति, उमंग और उसके हृदय की स्फूर्ति का हRead more
सही उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
निबंधकार यह तर्क देते हैं कि निबंध लेखन के लिए कोई विशेष विषय अनिवार्य नहीं है। जिस प्रकार हैट टाँगने के लिए खूँटी मात्र एक साधन है, उसी प्रकार विषय केवल आधार है। वास्तविक महत्व लेखक की मानसिक स्थिति, उमंग और उसके हृदय की स्फूर्ति का होता है। लेखक अपने मनोभावों और आवेग को किसी भी विषय में भर देता है, जिससे वह विषय प्रभावी बन जाता है। अतः विषय की तुलना में लेखक के भावों की प्रधानता सर्वोपरि होती है।
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See less“उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धित लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है? (क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना (ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना (ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
सही उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना निबंध की मानटेन पद्धति लेखक को शास्त्रीय बंधनों और जटिल नियमों से मुक्त करती है। इसमें लेखक जो कुछ देखता, सुनता और अनुभव करता है, उसे बिना किसी बनावट के लिपिबद्ध कर देता है। ऐसे निबंधों में न तो कल्पना की उड़ान होती है और न ही गंभीर तार्किक विश्लेषणRead more
सही उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
निबंध की मानटेन पद्धति लेखक को शास्त्रीय बंधनों और जटिल नियमों से मुक्त करती है। इसमें लेखक जो कुछ देखता, सुनता और अनुभव करता है, उसे बिना किसी बनावट के लिपिबद्ध कर देता है। ऐसे निबंधों में न तो कल्पना की उड़ान होती है और न ही गंभीर तार्किक विश्लेषण, बल्कि उनमें लेखक के सच्चे भावों की सच्ची अभिव्यक्ति और उसका उल्लास झलकता है। यह पद्धति अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाने का सशक्त आधार प्रदान करती है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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