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  1. They are cultural cornerstones, shaping moral values and shared narratives. Explanation: Their adaptability has allowed them to remain relevant across generations. For more please visit here: https://www.tiwariacademy.com/ncert-solutions-class-6-social-science-chapter-8/

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    Explanation: Their adaptability has allowed them to remain relevant across generations.

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  2. (i) बच्चा प्रकृति से गहरा लगाव रखता है। वह माँ द्वारा लगाए गए तुलसी के बिरवे और पिता द्वारा उगाए गए बरगद के पेड़ को देखकर प्रेरित होता है। बच्चा अपने लिए भी एक जगह ढूंढना चाहता है, जहाँ वह अपना योगदान दे सके। वह सोचता है कि वह अपने छोटे से आंगन में कहाँ अपना गुलाब का पौधा लगाए। (ii) बच्चा कल्पनाशीलRead more

    (i) बच्चा प्रकृति से गहरा लगाव रखता है। वह माँ द्वारा लगाए गए तुलसी के बिरवे और पिता द्वारा उगाए गए बरगद के पेड़ को देखकर प्रेरित होता है। बच्चा अपने लिए भी एक जगह ढूंढना चाहता है, जहाँ वह अपना योगदान दे सके। वह सोचता है कि वह अपने छोटे से आंगन में कहाँ अपना गुलाब का पौधा लगाए।
    (ii) बच्चा कल्पनाशील है वह माँ द्वारा लगाए गए तुलसी के बिरवे और पिता द्वारा उगाए गए बरगद के पेड़ को देखकर सोचता है कि उसे भी कोई नन्हा पौधा लगाना चाहिए। बच्चा के मन में गुलाब के पौधे को रोपने का विचार आता है। उसके लिए उचित जगह चाहता है। भविष्य के बारे में सोचता है। वह कल्पना करता है कि यह कैसे बड़ेगा, फूलेगा और खुशबू फैलाएगा।
    (iii) गुलाब को अक्सर सुंदरता और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसका खिलना प्रकृति के चमत्कार और जीवन की क्षणभंगुरता का प्रतीक है। यह गुलाब का सबसे प्रसिद्ध प्रतीक है। लाल गुलाब को प्यार, स्नेह और प्रशंसा का प्रतीक माना जाता है। गुलाब का उपयोग अक्सर खुशी और उत्सव के अवसरों को मनाने के लिए किया जाता है, जैसे कि शादियों, जन्मदिन और छुट्टियां। कई धर्मों में गुलाब का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में, गुलाब को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। ईसाई धर्म में, लाल गुलाब को अक्सर मसीह के रक्त और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। इस्लाम में, गुलाब को पैगंबर मुहम्मद का प्रतीक माना जाता है।

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  3. कवि कल्पना करता है कि वे पत्थर तालाब के किनारे पड़े चुपचाप उसका पानी पी रहे हैं। कब से? वर्षों से, शायद जब से तालाब बना, तब से। कवि यहाँ पर तालाब और उसमें स्थित पत्थरों के प्राचीन साहचर्य को व्यक्त करता है। तालाब के पानी में रहने वाली अन्य वस्तुएँ गतिशील हैं, लेकिन पत्थर बिना हिले-डुले उसमें चुपचापRead more

    कवि कल्पना करता है कि वे पत्थर तालाब के किनारे पड़े चुपचाप उसका पानी पी रहे हैं। कब से? वर्षों से, शायद जब से तालाब बना, तब से। कवि यहाँ पर तालाब और उसमें स्थित पत्थरों के प्राचीन साहचर्य को व्यक्त करता है। तालाब के पानी में रहने वाली अन्य वस्तुएँ गतिशील हैं, लेकिन पत्थर बिना हिले-डुले उसमें चुपचाप पड़े हुए हैं। इन्हें देखकर कवि कल्पना करता है कि ये पत्थर पता नहीं कितने समय से चुपचाप तालाब का पानी पी रहे हैं। पानी में डूबे पत्थरों में कवि को झुककर पानी पीते प्राणियों की याद आ रही होगी इसलिए यहाँ पर उसने पत्थरों का सुंदर मानवीकरण किया है। ये पत्थर निरंतर पानी पीने की मुद्रा में ही रहते हैं, इसलिए कवि विस्मय प्रकट करता है कि पता नहीं इनकी प्यास कब बुझेगी।

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  4. 'चंद्रगहना से लौटती बेर' कविता का संदेश और मेरी प्रतिक्रिया: प्रकृति प्रेम: कवि, जयशंकर प्रसाद, प्रकृति के प्रति गहरे प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करते हैं। वे चांदनी रात में खिली बेर के फूल की सुंदरता का बारीकी से वर्णन करते हैं, जो प्रकृति के चमत्कार और विस्मय का प्रतीक है। नारीत्व का सौंदर्य: कवि,Read more

    ‘चंद्रगहना से लौटती बेर’ कविता का संदेश और मेरी प्रतिक्रिया:
    प्रकृति प्रेम: कवि, जयशंकर प्रसाद, प्रकृति के प्रति गहरे प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करते हैं। वे चांदनी रात में खिली बेर के फूल की सुंदरता का बारीकी से वर्णन करते हैं, जो प्रकृति के चमत्कार और विस्मय का प्रतीक है।
    नारीत्व का सौंदर्य: कवि, बेर के फूल को एक सुंदर नारी के रूप में रूपकित करते हैं। वे उसकी कोमलता, मादकता और आकर्षण का चित्रण करते हैं। चांदनी में नहाया हुआ फूल, स्त्रीत्व की चमक और शोभा का प्रतीक बन जाता है।
    क्षणभंगुरता: कवि, फूल के शीघ्र मुरझाने पर भी ध्यान देते हैं। यह प्रकृति के चक्र और जीवन की क्षणभंगुरता का प्रतीक है। फूल का जीवन संसार की नश्वरता और सौंदर्य की क्षणभंगुरता की याद दिलाता है।
    आशावाद: इसके बावजूद, कविता में आशावाद का संदेश भी निहित है। मुरझाए हुए फूल के स्थान पर नए फूल खिलेंगे, जो जीवन के नवीकरण और सतत परिवर्तन का प्रतीक हैं।
    मैं ‘चंद्रगहना से लौटती बेर’ कविता के संदेश से बहुत प्रभावित हूं। प्रसाद जी ने प्रकृति और स्त्री सौंदर्य का अद्भुत चित्रण किया है। कविता में प्रयुक्त भाषा सरल और सुंदर है, जो भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करती है।
    हालांकि, मैं कविता के क्षणभंगुरता के पहलू से पूरी तरह सहमत नहीं हूं। मेरा मानना है कि यद्यपि जीवन क्षणभंगुर है, फिर भी हम हर पल का आनंद ले सकते हैं और सार्थक जीवन जी सकते हैं।
    कुल मिलाकर, ‘चंद्रगहना से लौटती बेर’ हिंदी साहित्य की एक उत्कृष्ट कृति है जो प्रकृति, सौंदर्य और जीवन के बारे में गहरे विचारों को प्रेरित करती है।

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