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How to get 95% in class 10th?
Achieving 95% in class 10 requires disciplined preparation and focused study. Start by creating a detailed timetable and prioritizing NCERT textbooks, as they are essential for board exams. Regularly solve sample papers and previous year questions for practice. Revise daily, address weaker topics, aRead more
Achieving 95% in class 10 requires disciplined preparation and focused study. Start by creating a detailed timetable and prioritizing NCERT textbooks, as they are essential for board exams. Regularly solve sample papers and previous year questions for practice. Revise daily, address weaker topics, and ensure conceptual clarity with help from teachers. Manage your time effectively during exams and stay consistent with your routine. Follow Tiwari Academy for study materials, mock tests, and expert tips to strengthen your preparation.
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How to score 95% in Maths?
Scoring 95% in math requires thorough understanding and consistent practice. Revise formulas daily, focus on NCERT exercises, and solve exemplar problems for conceptual clarity. Regularly attempt sample papers to improve speed and accuracy. Time management during exams is crucial; start with easy quRead more
Scoring 95% in math requires thorough understanding and consistent practice. Revise formulas daily, focus on NCERT exercises, and solve exemplar problems for conceptual clarity. Regularly attempt sample papers to improve speed and accuracy. Time management during exams is crucial; start with easy questions and move to challenging ones. Review mistakes from mock tests to strengthen weak areas. To enhance your preparation, follow Tiwari Academy for step-by-step solutions, curated resources, and detailed explanations designed specifically for math board exams.
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गौरैया के व्यक्तित्व में आने वाले परिवर्तन पर अपनी टिप्पणी लिखिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 13
गौरैया के व्यक्तित्व में यह परिवर्तन अत्यंत प्रेरणादायक और मार्मिक है। शुरुआत में एक साधारण और स्वार्थी पक्षी के रूप में दिखने वाली गौरैया धीरे-धीरे अपने निस्वार्थ कार्यों और दयालुता के कारण एक महान और प्रेरणादायक चरित्र बन जाती है। उसके व्यक्तित्व में आने वाला यह परिवर्तन कहानी के केंद्रीय संदेश कोRead more
गौरैया के व्यक्तित्व में यह परिवर्तन अत्यंत प्रेरणादायक और मार्मिक है। शुरुआत में एक साधारण और स्वार्थी पक्षी के रूप में दिखने वाली गौरैया धीरे-धीरे अपने निस्वार्थ कार्यों और दयालुता के कारण एक महान और प्रेरणादायक चरित्र बन जाती है। उसके व्यक्तित्व में आने वाला यह परिवर्तन कहानी के केंद्रीय संदेश को गहराई से उजागर करता है: सच्ची महानता और सुख दूसरों की सेवा और मदद में है, न कि केवल अपने व्यक्तिगत सुख में।
See lessगौरैया की यात्रा दर्शाती है कि किसी भी साधारण प्राणी में महानता का गुण हो सकता है, बशर्ते वह दूसरों के लिए अपने स्वार्थ को त्याग कर सेवा और करुणा की राह पर चले। उसकी इस यात्रा और परिवर्तन ने कहानी को एक गहरा और स्थायी संदेश दिया है।
सुखी राजकुमार कहानी में चित्रित नगर से अपने परिवेश की तुलना कीजिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 13
"सुखी राजकुमार" कहानी में चित्रित नगर एक अद्भुत और विपरीतताओं से भरा हुआ स्थान है। यह नगर एक ओर समृद्धि और वैभव का प्रतीक है, जहां राजकुमार की प्रतिमा सोने और रत्नों से जड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर इस नगर में गरीबों और जरूरतमंदों की भी बड़ी संख्या है, जो भूख और गरीबी से जूझ रहे हैं। कहानी के नगर में,Read more
“सुखी राजकुमार” कहानी में चित्रित नगर एक अद्भुत और विपरीतताओं से भरा हुआ स्थान है। यह नगर एक ओर समृद्धि और वैभव का प्रतीक है, जहां राजकुमार की प्रतिमा सोने और रत्नों से जड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर इस नगर में गरीबों और जरूरतमंदों की भी बड़ी संख्या है, जो भूख और गरीबी से जूझ रहे हैं।
See lessकहानी के नगर में, एक भव्य और चमचमाती प्रतिमा शहर के मध्य में स्थापित है, जो समृद्धि और वैभव का प्रतीक है। लेकिन इस नगर में कई गरीब लोग हैं, जो बुरी परिस्थितियों में जी रहे हैं, जैसे कि एक माँ अपने बीमार बच्चे के लिए इलाज नहीं करवा सकती, और एक लेखक जो भूख से मर रहा है।
मेरे परिवेश में भी ऐसी विषमताएं देखने को मिलती हैं। एक ओर, ऊँची इमारतें, मॉल और संपन्न लोग हैं, वहीं दूसरी ओर, फुटपाथ पर सोते हुए बेघर लोग, गरीब बस्तियों में रहने वाले, और दिन-रात मेहनत करने वाले मजदूर भी हैं। यह आर्थिक असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
सुखी राजकुमार कहानी में बच्चों की स्थिति का मूल्यांकन कीजिए और स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव लिखिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 13
"सुखी राजकुमार" कहानी में बच्चों की स्थिति का मूल्यांकन करना हमें उनके जीवन की कठिनाइयों और उनकी जरूरतों को समझने में मदद करता है। कहानी में कुछ बच्चे विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जैसे कि गरीबी, बीमारी, और शिक्षा की कमी। आइए बच्चों की स्थिति का विश्लेषण करें और फिर उनकी स्थिति कोRead more
“सुखी राजकुमार” कहानी में बच्चों की स्थिति का मूल्यांकन करना हमें उनके जीवन की कठिनाइयों और उनकी जरूरतों को समझने में मदद करता है। कहानी में कुछ बच्चे विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जैसे कि गरीबी, बीमारी, और शिक्षा की कमी। आइए बच्चों की स्थिति का विश्लेषण करें और फिर उनकी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कुछ सुझाव दें।
See lessबच्चों की स्थिति का मूल्यांकन:
गरीबी: कहानी में एक बच्चा दिखाया गया है, जिसकी माँ सिलाई का काम करती है, लेकिन इतनी गरीबी है कि बच्चे को खाना नहीं मिल पाता और वह बीमार हो जाता है।
बीमारी और चिकित्सा: बच्चों की स्थिति इतनी खराब है कि बीमार बच्चों का इलाज नहीं हो पाता। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि चिकित्सा सुविधाओं की कमी है।
शिक्षा की कमी: कहानी में बच्चों की शिक्षा का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं है, लेकिन यह समझा जा सकता है कि गरीबी और अन्य समस्याओं के कारण बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होती होगी।
भावनात्मक उपेक्षा: गरीब बच्चों को उनकी आवश्यकताओं के प्रति समाज की ओर से उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। उन्हें प्यार, देखभाल और सहारा नहीं मिलता।
स्थिति को बेहतर बनाने के सुझाव:
शिक्षा की सुविधा: बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। सरकार और एनजीओ मिलकर गरीब बच्चों के लिए स्कूल और शिक्षण केंद्र स्थापित कर सकते हैं। शिक्षा का अधिकार उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाएगा।
स्वास्थ्य सेवाएं: गरीब बच्चों के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मोबाइल चिकित्सा इकाइयों का विस्तार करना आवश्यक है ताकि हर बच्चे को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
पोषण और भोजन: बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की जानी चाहिए। मध्याह्न भोजन योजना और पोषण कार्यक्रमों का विस्तार करके बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन प्रदान किया जा सकता है।
आर्थिक सहायता: गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। इसके माध्यम से वे अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकते हैं।
समाज की भूमिका: समाज को भी बच्चों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। दान, स्वयंसेवा, और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को आवश्यक संसाधन और समर्थन मिल सकता है।
सुरक्षा और संरक्षण: बच्चों के खिलाफ हिंसा, शोषण और उपेक्षा को रोकने के लिए सख्त कानून और जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सामुदायिक निगरानी कार्यक्रम लागू किए जा सकते हैं।