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जैन धर्म का संस्थापक किसे माना जाता है? NIOS Class 10 Social Science Chapter 1
जैन धर्म का कोई एक संस्थापक नहीं है, क्योंकि यह एक प्राचीन धर्म है जो समय-समय पर विभिन्न तीर्थंकरों द्वारा विकसित और प्रचारित किया गया। हालाँकि, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, भगवान महावीर (599 ईसा पूर्व – 527 ईसा पूर्व) को अक्सर इसका संस्थापक माना जाता है, क्योंकि उन्होंने जैन धर्म को सुव्यवस्थित और लRead more
जैन धर्म का कोई एक संस्थापक नहीं है, क्योंकि यह एक प्राचीन धर्म है जो समय-समय पर विभिन्न तीर्थंकरों द्वारा विकसित और प्रचारित किया गया।
See lessहालाँकि, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, भगवान महावीर (599 ईसा पूर्व – 527 ईसा पूर्व) को अक्सर इसका संस्थापक माना जाता है, क्योंकि उन्होंने जैन धर्म को सुव्यवस्थित और लोकप्रिय बनाया।
महावीर का जन्म वैशाली के पास कुंडलपुर (वर्तमान में बिहार) में हुआ था। उनका मूल नाम वर्धमान था। उन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों को महत्व दिया और इन्हें जीवन का मार्गदर्शक बनाया।
महावीर से पहले, जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ भी महत्वपूर्ण थे, जिनके उपदेशों को महावीर ने और विकसित किया।
उत्तर वैदिक काल के लोगों के मुख्य व्यवसाय क्या थे? NIOS Class 10 Social Science Chapter 1
उत्तर वैदिक काल (1000-600 ईसा पूर्व) में मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन थे। लोहे के औजारों के उपयोग से खेती में सुधार हुआ, और धान, जौ, गेहूँ जैसी फसलों की खेती व्यापक रूप से की गई। सिंचाई के साधनों का विकास भी इस काल में हुआ। पशुपालन में गाय, बैल, घोड़े, और बकरियों का पालन महत्वपूर्ण था। गाय को धन औरRead more
उत्तर वैदिक काल (1000-600 ईसा पूर्व) में मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन थे। लोहे के औजारों के उपयोग से खेती में सुधार हुआ, और धान, जौ, गेहूँ जैसी फसलों की खेती व्यापक रूप से की गई। सिंचाई के साधनों का विकास भी इस काल में हुआ।
See lessपशुपालन में गाय, बैल, घोड़े, और बकरियों का पालन महत्वपूर्ण था। गाय को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता था।
व्यापार और वस्तु-विनिमय प्रणाली का विकास हुआ, जिसमें धातुओं, कपड़ों और अन्य वस्तुओं का आदान-प्रदान होता था। समुद्री और स्थल व्यापार का विस्तार हुआ।
शिल्पकारी और धातुकर्म जैसे कार्य भी उन्नत हुए, जिनमें लोहे, तांबे और सोने का प्रयोग बढ़ा।
धार्मिक अनुष्ठानों और यज्ञों ने ब्राह्मण वर्ग को प्रभावशाली बनाया। युद्ध और सुरक्षा के कारण क्षत्रिय वर्ग का महत्व बढ़ा। इस प्रकार कृषि, पशुपालन, और अन्य शिल्प इस काल के मुख्य व्यवसाय थे।
अशोक ने कलिंग यु़द्ध के बाद कौन सा धर्म अपनाया? NIOS Class 10 Social Science Chapter 1
अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाया। युद्ध की विनाशकारी प्रकृति से विचलित होकर, अशोक ने हिंसा और रक्तपात त्याग दिया। उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं के उपदेशों को अपनाया और शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाया। युद्ध की विनाशकारी प्रकृति से विचलित होकर, अशोक ने हिंसा और रक्तपात त्याग दिया। उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं के उपदेशों को अपनाया और शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
See lessA body is projected from earth’s surface to become its satellite. Its time period of revolution will not depend upon
The orbital period of a satellite depends on the radius of its orbit and the mass of the central body, such as Earth, but it is independent of the satellite's mass. This means that whether the satellite is small or large, its orbital period remains unchanged as long as the orbital radius and the cenRead more
The orbital period of a satellite depends on the radius of its orbit and the mass of the central body, such as Earth, but it is independent of the satellite’s mass. This means that whether the satellite is small or large, its orbital period remains unchanged as long as the orbital radius and the central body’s mass remain constant. This principle highlights that the motion of a satellite is governed by gravitational forces and does not rely on the satellite’s own mass, making it a fundamental aspect of orbital mechanics.
T = 2π√((R + h)³ / GM),
See lessClearly, T does not depend on the mass m of the satellite.
प्राचीन भारत में चार मुख्य शिक्षा के केन्द्र कौन से थे? NIOS Class 10 Social Science Chapter 1
प्राचीन भारत में चार मुख्य शिक्षा केंद्र तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी थे। ये केंद्र ज्ञान और शिक्षा के प्रमुख स्थल थे और यहाँ विभिन्न विषयों की पढ़ाई होती थी। तक्षशिला: आधुनिक पाकिस्तान में स्थित, यह दुनिया के सबसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों में से एक था। यहाँ चिकित्सा, खगोलशास्त्र, राजनीति,Read more
प्राचीन भारत में चार मुख्य शिक्षा केंद्र तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी थे। ये केंद्र ज्ञान और शिक्षा के प्रमुख स्थल थे और यहाँ विभिन्न विषयों की पढ़ाई होती थी।
See lessतक्षशिला: आधुनिक पाकिस्तान में स्थित, यह दुनिया के सबसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों में से एक था। यहाँ चिकित्सा, खगोलशास्त्र, राजनीति, और युद्ध कला की शिक्षा दी जाती थी।
नालंदा: बिहार में स्थित यह विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय था। बौद्ध धर्म के अध्ययन के साथ ही दर्शन, गणित, और विज्ञान पढ़ाया जाता था। विदेशी छात्र भी यहाँ पढ़ने आते थे।
विक्रमशिला: नालंदा के समकालीन, यह शिक्षा केंद्र भी बिहार में स्थित था। यहाँ तंत्र, बौद्ध धर्म और अन्य विषयों की शिक्षा दी जाती थी।
वल्लभी: गुजरात में स्थित यह शिक्षा केंद्र प्रशासन, राजनीति, और व्यापार के अध्ययन के लिए प्रसिद्ध था।
इन केंद्रों ने प्राचीन भारत को वैश्विक शिक्षा का केंद्र बनाया।