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  1. तांबा और पत्थर दोनों के प्रयोग पर आधारित संस्कृति को ताम्रपाषाण संस्कृति कहा जाता है। यह संस्कृति लगभग 6000 ईसा पूर्व से 3000 ईसा पूर्व तक भारत में विद्यमान थी।

    तांबा और पत्थर दोनों के प्रयोग पर आधारित संस्कृति को ताम्रपाषाण संस्कृति कहा जाता है। यह संस्कृति लगभग 6000 ईसा पूर्व से 3000 ईसा पूर्व तक भारत में विद्यमान थी।

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  2. मेसोपोटामिया की सभ्यता मुख्य रूप से दजला और फरात नदियों के बीच विकसित हुई थी। इन दोनों नदियों को अक्सर "दो नदियों की भूमि" के रूप में भी जाना जाता है, जो मेसोपोटामिया का शाब्दिक अर्थ है। दजला और फरात नदियाँ मेसोपोटामिया की सभ्यताओं के उदय और पतन के लिए महत्वपूर्ण थीं। इन नदियों ने प्राचीन लोगों को सRead more

    मेसोपोटामिया की सभ्यता मुख्य रूप से दजला और फरात नदियों के बीच विकसित हुई थी। इन दोनों नदियों को अक्सर “दो नदियों की भूमि” के रूप में भी जाना जाता है, जो मेसोपोटामिया का शाब्दिक अर्थ है।
    दजला और फरात नदियाँ मेसोपोटामिया की सभ्यताओं के उदय और पतन के लिए महत्वपूर्ण थीं। इन नदियों ने प्राचीन लोगों को समृद्ध और शक्तिशाली सभ्यताएं विकसित करने में सक्षम बनाया, लेकिन बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने इन सभ्यताओं को कमजोर भी किया।

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  3. भारत में सिंधु-सरस्वती सभ्यता के अनेक महत्वपूर्ण स्थल हैं, जिनमें से दो प्रमुख स्थल निम्नलिखित हैं: 1. हड़प्पा (पंजाब, पाकिस्तान): यह सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे पहला ज्ञात शहर है। यहाँ खुदाई में विशाल किला, स्नानागार, दाने भंडारगृह, जल निकासी व्यवस्था और मोहनजोदड़ो जैसी पक्की ईंटों से बनी इमारतेंRead more

    भारत में सिंधु-सरस्वती सभ्यता के अनेक महत्वपूर्ण स्थल हैं, जिनमें से दो प्रमुख स्थल निम्नलिखित हैं:
    1. हड़प्पा (पंजाब, पाकिस्तान): यह सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे पहला ज्ञात शहर है। यहाँ खुदाई में विशाल किला, स्नानागार, दाने भंडारगृह, जल निकासी व्यवस्था और मोहनजोदड़ो जैसी पक्की ईंटों से बनी इमारतें मिली हैं।
    2. मोहनजोदड़ो (सिंध, पाकिस्तान): यह सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे अच्छी तरह से संरक्षित शहर है। यहाँ ‘महान स्नानागार’, ‘अन्न भंडार’, ‘स्तूप’ और ‘सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि’ वाले मुहरें मिली हैं।
    इन दो प्रमुख स्थलों के अलावा, भारत में सिंधु-सरस्वती सभ्यता के कई अन्य महत्वपूर्ण स्थल भी हैं, जिनमें कालीबंगा (राजस्थान), लोथल (गुजरात), बनवाली (हरियाणा), रखीगढ़ी (हरियाणा) और धोलावीरा (गुजरात) शामिल हैं।

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  4. (क) विभिन्न स्थलों पर मिले ..ताबीज और जंतर.... से पता चलता है कि हड़प्पावासी आत्माओं और भूत-प्रेतों में विश्वास करते थे। (ख) ... प्राकृतिक आपदाओं को... सिंधु-सरस्वती सभ्यता के पतन का सबसे महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। (ग) सिंधु-सरस्वती....मेसोपोटामिया.... के साथ विदेशी व्यापार करते थे। (घ) समाज....वRead more

    (क) विभिन्न स्थलों पर मिले ..ताबीज और जंतर…. से पता चलता है कि हड़प्पावासी आत्माओं और भूत-प्रेतों में विश्वास करते थे।
    (ख) … प्राकृतिक आपदाओं को… सिंधु-सरस्वती सभ्यता के पतन का सबसे महत्वपूर्ण कारण माना जाता है।
    (ग) सिंधु-सरस्वती….मेसोपोटामिया…. के साथ विदेशी व्यापार करते थे।
    (घ) समाज….वर्गों….. में विभाजित था।

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  5. नव पाषाण काल के अंत में धातु का इस्तेमाल शुरू हुआ। तांबा पहली धातु थी, जिसका इस्तेमाल मानव ने किया।

    नव पाषाण काल के अंत में धातु का इस्तेमाल शुरू हुआ। तांबा पहली धातु थी, जिसका इस्तेमाल मानव ने किया।

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