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लेखक ने ‘दूर के ढोल सुहावने’ लोकोक्ति के माध्यम से मानवीय मनोविज्ञान के किस सत्य को उजागर किया है?
लेखक के अनुसार, 'दूर के ढोल सुहावने' केवल एक कहावत नहीं बल्कि मानव मन की एक गहरी प्रवृत्ति है। जब हम किसी वस्तु के निकट होते हैं, तो उसकी कमियां और कर्कशता हमें परेशान करती है, जैसे ढोल के पास बैठे व्यक्ति को उसका शोर सुनाई देता है। लेकिन दूर बैठे व्यक्ति को केवल उसकी गूँज और मधुरता का अनुभव होता हैRead more
लेखक के अनुसार, ‘दूर के ढोल सुहावने’ केवल एक कहावत नहीं बल्कि मानव मन की एक गहरी प्रवृत्ति है। जब हम किसी वस्तु के निकट होते हैं, तो उसकी कमियां और कर्कशता हमें परेशान करती है, जैसे ढोल के पास बैठे व्यक्ति को उसका शोर सुनाई देता है। लेकिन दूर बैठे व्यक्ति को केवल उसकी गूँज और मधुरता का अनुभव होता है। इसी तरह, हम अपने वर्तमान की समस्याओं से इतने घिरे होते हैं कि हमें अपना अतीत या भविष्य अधिक सुखद लगता है। यह मनोवैज्ञानिक सत्य है कि दूरी दोषों को छिपा देती है और केवल सुंदरता को उभारती है, जिससे मनुष्य हमेशा उस सुख की कामना करता है जो उसके पास वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See less“हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है? (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना (ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना (ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना (घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
सही उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना निबंधकार यह तर्क देते हैं कि निबंध लेखन के लिए कोई विशेष विषय अनिवार्य नहीं है। जिस प्रकार हैट टाँगने के लिए खूँटी मात्र एक साधन है, उसी प्रकार विषय केवल आधार है। वास्तविक महत्व लेखक की मानसिक स्थिति, उमंग और उसके हृदय की स्फूर्ति का हRead more
सही उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
निबंधकार यह तर्क देते हैं कि निबंध लेखन के लिए कोई विशेष विषय अनिवार्य नहीं है। जिस प्रकार हैट टाँगने के लिए खूँटी मात्र एक साधन है, उसी प्रकार विषय केवल आधार है। वास्तविक महत्व लेखक की मानसिक स्थिति, उमंग और उसके हृदय की स्फूर्ति का होता है। लेखक अपने मनोभावों और आवेग को किसी भी विषय में भर देता है, जिससे वह विषय प्रभावी बन जाता है। अतः विषय की तुलना में लेखक के भावों की प्रधानता सर्वोपरि होती है।
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See less“उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धित लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है? (क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना (ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना (ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
सही उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना निबंध की मानटेन पद्धति लेखक को शास्त्रीय बंधनों और जटिल नियमों से मुक्त करती है। इसमें लेखक जो कुछ देखता, सुनता और अनुभव करता है, उसे बिना किसी बनावट के लिपिबद्ध कर देता है। ऐसे निबंधों में न तो कल्पना की उड़ान होती है और न ही गंभीर तार्किक विश्लेषणRead more
सही उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
निबंध की मानटेन पद्धति लेखक को शास्त्रीय बंधनों और जटिल नियमों से मुक्त करती है। इसमें लेखक जो कुछ देखता, सुनता और अनुभव करता है, उसे बिना किसी बनावट के लिपिबद्ध कर देता है। ऐसे निबंधों में न तो कल्पना की उड़ान होती है और न ही गंभीर तार्किक विश्लेषण, बल्कि उनमें लेखक के सच्चे भावों की सच्ची अभिव्यक्ति और उसका उल्लास झलकता है। यह पद्धति अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाने का सशक्त आधार प्रदान करती है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See lessक्या लिखूँ का सारांश (गंगा अध्याय 2 पाठ्य पुस्तक 2026-27)
कक्षा 9 के लिए हिंदी गंगा (नया एनसीईआरटी 2026-27) दूसरा अध्याय - 'क्या लिखूँ?' निबंध में लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने निबंध लेखन की कला का सूक्ष्म विश्लेषण किया है। लेखक दो अलग-अलग विषयों, 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार' के माध्यम से बताते हैं कि एक निबंधकार के लिए विषय का महत्व गौण होता है,Read more
कक्षा 9 के लिए हिंदी गंगा (नया एनसीईआरटी 2026-27) दूसरा अध्याय – ‘क्या लिखूँ?’ निबंध में लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने निबंध लेखन की कला का सूक्ष्म विश्लेषण किया है। लेखक दो अलग-अलग विषयों, ‘दूर के ढोल सुहावने’ और ‘समाज-सुधार’ के माध्यम से बताते हैं कि एक निबंधकार के लिए विषय का महत्व गौण होता है, जबकि उसके अपने मौलिक विचारों और आंतरिक उल्लास की प्रधानता सर्वोपरि होती है। वे आधुनिक और प्राचीन दृष्टिकोणों की तुलना करते हुए स्पष्ट करते हैं कि तरुण भविष्य के सपने देखते हैं और वृद्ध अतीत का गौरव गान करते हैं। अंततः, निबंध वही श्रेष्ठ है जिसमें लेखक के अनुभवों की सजीवता और शैली की सरलता का सुंदर समन्वय दिखाई दे।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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See less“तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है? (क) तर्क और भावना (ख) ज्ञान और शिक्षा (ग) परिश्रम और उपलब्धि (घ) अभिलाषा और अनुभव
सही उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव तरुण और वृद्ध दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि वे यथार्थ से दूर रहते हैं। तरुणों में भविष्य को बदलने की अभिलाषा और आक्रोश होता है, इसलिए उन्हें आने वाला समय उज्ज्वल दिखता है। इसके विपरीत, वृद्ध अपनी बाल्यावस्था और तरुणावस्था के अनुभवों से दूर आ चुके होतेRead more
सही उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव
तरुण और वृद्ध दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि वे यथार्थ से दूर रहते हैं। तरुणों में भविष्य को बदलने की अभिलाषा और आक्रोश होता है, इसलिए उन्हें आने वाला समय उज्ज्वल दिखता है। इसके विपरीत, वृद्ध अपनी बाल्यावस्था और तरुणावस्था के अनुभवों से दूर आ चुके होते हैं, जिससे उन्हें अतीत की स्मृतियाँ सुखद और गौरवशाली प्रतीत होती हैं। यह तुलना पूर्णतः भविष्य की आकांक्षाओं और अतीत के अनुभवों के मनोवैज्ञानिक आधार पर टिकी है।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्द-उत्तर, सारांश तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं।
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