Piyush365
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“कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?

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घर से दूर होने पर अपनों की सुरक्षा की चिंता मन को विचलित कर देती है। बार-बार मन में अनहोनी के विचार आते हैं, जिससे एकाग्रता भंग हो जाती है और शांति से किसी कार्य को करना कठिन हो जाता है।

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  1. ताई की तरह, जब मैं अपने परिवार से दूर होता हूँ, तो मेरा मन पूरी तरह से उन्हीं की सुरक्षा और स्वास्थ्य की चिंताओं में उलझा रहता है। किसी प्रिय व्यक्ति या कीमती वस्तु की सुरक्षा का डर एक मानसिक बोझ बन जाता है। बार-बार फोन करके उनका हाल जानना और घर की सुरक्षा की कल्पना करना एक असहज स्थिति पैदा करता है। यह चिंता हमें भीतर से बेचैन रखती है, जिससे हम बाहर की खुशियों का आनंद नहीं ले पाते।

     

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