घर से दूर होने पर अपनों की सुरक्षा की चिंता मन को विचलित कर देती है। बार-बार मन में अनहोनी के विचार आते हैं, जिससे एकाग्रता भंग हो जाती है और शांति से किसी कार्य को करना कठिन हो जाता है।
“कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
Share
ताई की तरह, जब मैं अपने परिवार से दूर होता हूँ, तो मेरा मन पूरी तरह से उन्हीं की सुरक्षा और स्वास्थ्य की चिंताओं में उलझा रहता है। किसी प्रिय व्यक्ति या कीमती वस्तु की सुरक्षा का डर एक मानसिक बोझ बन जाता है। बार-बार फोन करके उनका हाल जानना और घर की सुरक्षा की कल्पना करना एक असहज स्थिति पैदा करता है। यह चिंता हमें भीतर से बेचैन रखती है, जिससे हम बाहर की खुशियों का आनंद नहीं ले पाते।
For more NCERT Solutions of Class 9 Hindi Ganga Chapter 3 संवादहीन Question Answer (2026-27)
एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 3 संवादहीन समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्दों के अर्थ, व्याकरण तथा सारांश – सत्र 2026-27 के लिए विद्यार्थी यहाँ से निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।
https://hindi.tiwariacademy.com/ncert-solutions/class-9/hindi/ganga-chapter-3/