यदि मैं वह छोटी लड़की होता, तो मैं भी बैलों की पीड़ा को समझते हुए उन्हें भरपेट भोजन खिलाता। मैं उनकी रस्सियाँ खोलकर उन्हें आजाद करने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित रास्ता भी बताने की पूरी कोशिश करता।
“उसने उनके माथे सहलाए और बोली— खोल देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
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बैलों की दुर्दशा देखकर मेरा हृदय भी द्रवित हो उठता। मैं केवल उन्हें रोटियाँ ही नहीं खिलाता, बल्कि उनके घावों पर तेल और मरहम भी लगाता। मैं उन्हें रात के अंधेरे में चुपके से खोल देता ताकि वे गया की क्रूरता से बच सकें। साथ ही, मैं यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता कि वे सही दिशा में भागें ताकि उन्हें दोबारा पकड़ा न जा सके। पशुओं के प्रति करुणा दिखाना ही सच्ची मानवता है। मैं उनके प्रति वैसा ही प्रेम भाव रखता जैसा झूरी रखता था, क्योंकि स्नेह की कमी ही उन्हें सबसे अधिक दुखी कर रही थी।
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