राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान, कक्षा 10, हिंदी, अध्याय 14, बूढ़ी पृथ्वी का दुख संज्ञा उस शब्द को कहते हैं जो किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, भाव, गुण, अवस्था या कार्य के नाम को प्रकट करता है। यह वाक्य में मुख्य विषय ...
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NIOS Class 10 Hindi Chapter 14 बूढ़ी पृथ्वी का दुख “नदियों का मुँह ढाँपकर रोना” प्रकृति की पीड़ा और मानवीय संवेदनहीनता का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि नदियां, जो जीवन का स्रोत हैं, मनुष्य के अत्याचारों से आहत हैं। प्रदूषण, ...
NIOS Class 10 Hindi Chapter 14 हिन्दी साहित्य में मुहावरों का प्रयोग भाषा को रोचक, प्रभावी और जीवंत बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये वाक्यांश संक्षिप्त लेकिन गहरे अर्थ व्यक्त करते हैं और पाठकों को भावनाओं और विचारों को बेहतर ...
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान, कक्षा 10, हिंदी, अध्याय 14, बूढ़ी पृथ्वी का दुख मनुष्य का प्रकृति-विरोधी व्यवहार, जैसे वनों की कटाई, प्रदूषण, और प्राकृतिक संसाधनों का अति-दोहन, अंततः मानव-विरोधी बन जाता है। यह व्यवहार पारिस्थितिकी तंत्र को असंतुलित करता है, ...
NIOS Class 10 Hindi Chapter 14 बूढ़ी पृथ्वी का दुख ‘बूढ़ी पृथ्वी का दुख’ कविता में पृथ्वी को एक बुजुर्ग मां के रूप में चित्रित किया गया है, जो अपने बच्चों (मनुष्यों) की निष्ठुरता और स्वार्थपूर्ण व्यवहार से आहत है। पृथ्वी ...