कुंभ का आयोजन अमृत प्राप्ति की पौराणिक मान्यता और धार्मिक शुद्धता के लिए किया जाता है। पिछला महाकुंभ 2025 में प्रयागराज में संपन्न हुआ था, जबकि अगला आयोजन 2027 में नासिक में होगा।
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हमारे यहाँ सावन मेले में चारों ओर हरियाली और फूलों की खुशबू होती है। ढोल-नगाड़ों का शोर, गर्मागर्म जलेबियों का स्वाद और लोगों की भारी भीड़ श्रद्धा और आनंद का अद्भुत वातावरण निर्मित करती है।
ताई गाँव के साथियों के साथ रेलगाड़ी द्वारा प्रयागराज गई होंगी। उन्होंने साधारण श्रेणी का टिकट लेकर सफर किया होगा और रास्ते में घर से ले जाया गया पूड़ी-अचार खाकर धर्मशाला में निवास किया होगा।
ग्रामीण समाज में अक्सर महिलाओं की पहचान उनके पति के नाम या व्यवसाय से जुड़ी होती है। लेखक ने सामाजिक परिवेश की इसी वास्तविकता को दर्शाने के लिए पात्र का नाम नहीं दिया है।
हाँ, लंबे समय तक कैद में रहने पर प्राणी अपनी स्वाभाविक स्वतंत्रता और उड़ने की क्षमता भूल जाते हैं। वे बाहरी दुनिया के खतरों से डरने लगते हैं और पिंजरे की सुरक्षा को ही अपनी नियति मान लेते हैं।