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करत-करत अभ्यास तें… दोहे में मूर्ख के लिए जड़मति शब्द का प्रयोग क्यों किया गया? NIOS Class 10 Hindi Chapter 2
इस दोहे में, "जड़मति" शब्द का प्रयोग एक ऐसे व्यक्ति के लिए किया गया है जो स्वाभाविक रूप से बुद्धिमान नहीं है, या जिसे सीखने में कठिनाई होती है। हालांकि, यह दोहा हमें सिखाता है कि निरंतर अभ्यास और प्रयासों के द्वारा, कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी मूर्ख क्यों न हो, ज्ञान और समझ प्राप्त कर सकता है।Read more
इस दोहे में, “जड़मति” शब्द का प्रयोग एक ऐसे व्यक्ति के लिए किया गया है जो स्वाभाविक रूप से बुद्धिमान नहीं है, या जिसे सीखने में कठिनाई होती है।
See lessहालांकि, यह दोहा हमें सिखाता है कि निरंतर अभ्यास और प्रयासों के द्वारा, कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी मूर्ख क्यों न हो, ज्ञान और समझ प्राप्त कर सकता है।
“जड़मति” शब्द का प्रयोग यहां केवल यह दर्शाने के लिए किया गया है कि शुरुआत में व्यक्ति की बुद्धि कम है, लेकिन अभ्यास से उसका ज्ञान बढ़ता है।
कबीर दास इस शब्द का प्रयोग यह बताने के लिए करते हैं कि लगातार अभ्यास से साधारण या कम बुद्धि वाला व्यक्ति भी कुशल और समझदार बन सकता है। “जड़मति” से यह भी संकेत मिलता है कि व्यक्ति चाहे कितना भी अज्ञानी या कमजोर हो, निरंतर प्रयास और अभ्यास के बल पर वह अपने ज्ञान और कौशल में वृद्धि कर सकता है। इस दोहे का उद्देश्य यह है कि व्यक्ति अपनी कमियों से निराश न हो, बल्कि अभ्यास के जरिए उन पर विजय प्राप्त करे।
निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम शब्द छाँटकर लिखिएः कुल, सुरा, गुरु, कुम्हार, कुंभ, निदंक, सुभाय, जल, घर, हाथ, काम, पावस, मौन, खून, प्रीति, जहान।
ऊपर दिए गए शब्दों में से निम्नलिखित शब्द तत्सम शब्द हैं: कुल, गुरु, कुंभ, निंदक, सुभाय, जल, घर, हाथ, काम, पावस, मौन, जहान।
ऊपर दिए गए शब्दों में से निम्नलिखित शब्द तत्सम शब्द हैं:
See lessकुल, गुरु, कुंभ, निंदक, सुभाय, जल, घर, हाथ, काम, पावस, मौन, जहान।
निम्नलिखित दोहे को धयानपूर्वक पढि़ए और पूछे गए प्रश्न का उत्तर दीजिएः कबिरा गर्व न कीजिए, काल गहे कर केस। क्या जानौं कित मारिहै, क्या घर क्या परदेस।। काल गहे कर केस का अर्थ स्पष्ट कीजिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 2
इस पंक्ति में कबीरदास जी मृत्यु की अनिश्चितता पर प्रकाश डाल रहे हैं। वे कहते हैं कि मृत्यु का देवता हमारे बालों को पकड़कर हमें अपने साथ ले जाता है, और हमें नहीं पता कि वह हमें कहाँ मारेगा, घर में या परदेस में। यह पंक्ति हमें जीवन की नश्वरता और मृत्यु की अनिवार्यता का एहसास दिलाती है। यह हमें यह भी सRead more
इस पंक्ति में कबीरदास जी मृत्यु की अनिश्चितता पर प्रकाश डाल रहे हैं। वे कहते हैं कि मृत्यु का देवता हमारे बालों को पकड़कर हमें अपने साथ ले जाता है, और हमें नहीं पता कि वह हमें कहाँ मारेगा, घर में या परदेस में। यह पंक्ति हमें जीवन की नश्वरता और मृत्यु की अनिवार्यता का एहसास दिलाती है। यह हमें यह भी सिखाती है कि हमें हर पल का सदुपयोग करना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए, क्योंकि हमें नहीं पता कि कब मृत्यु आ जाएगी।
See lessनिम्नलिखित दोहे को धयानपूर्वक पढि़ए और पूछे गए प्रश्न का उत्तर दीजिएः निम्नलिखित दोहे को धयानपूर्वक पढि़ए और पूछे गए प्रश्न का उत्तर दीजिएः रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय। सुन इठलैहैं लोग सब, बाँट न लइहै कोय।। मन की व्यथा को छिपाकर क्यों रखना चाहिए? NIOS Class 10 Hindi Chapter 2
रहीम कहते हैं कि अपने मन की व्यथा का दूसरों के सामने प्रकट करने का कोई लाभ नहीं है। लोग केवल सुनते हैं और हसंते हैं लेकिन कोई सहायता नहीं करता। इसलिए अपने दुःख को अपने अंतर में छुपा के रखना चाहिए।
रहीम कहते हैं कि अपने मन की व्यथा का दूसरों के सामने प्रकट करने का कोई लाभ नहीं है। लोग केवल सुनते हैं और हसंते हैं लेकिन कोई सहायता नहीं करता। इसलिए अपने दुःख को अपने अंतर में छुपा के रखना चाहिए।
See lessहिंदी की उपभाषाओं का वर्गवार उल्लेख कीजिए। NIOS Class 10 Hindi Chapter 2
हिंदी की उपभाषाओं का वर्गवार उल्लेख: 1. पूर्वी हिंदी: अवधी, भोजपुरी, मैथिली, मगही, नेपाली, बंगाली 2. पश्चिमी हिंदी: हरियाणवी, राजस्थानी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, सिन्धी 3. मध्यवर्ती हिंदी: खड़ी बोली (आधुनिक हिंदी), ब्रज भाषा, कन्नौजी, बुंदेली, हंसबाज, अवधी के कुछ रूप 4. दक्षिणी हिंदी: मराठी, गुजराती,Read more
हिंदी की उपभाषाओं का वर्गवार उल्लेख:
See less1. पूर्वी हिंदी:
अवधी, भोजपुरी, मैथिली, मगही, नेपाली, बंगाली
2. पश्चिमी हिंदी:
हरियाणवी, राजस्थानी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, सिन्धी
3. मध्यवर्ती हिंदी:
खड़ी बोली (आधुनिक हिंदी), ब्रज भाषा, कन्नौजी, बुंदेली, हंसबाज, अवधी के कुछ रूप
4. दक्षिणी हिंदी:
मराठी, गुजराती, सिन्धी, कोंकणी,
कुछ अन्य उपभाषाएं:
गढ़वाली
कुमाऊनी
डोगरी
पहाड़ी
छत्तीसगढ़ी
सिक्किमी
यह सूची पूर्ण नहीं है, और हिंदी में अनेक अन्य उपभाषाएं भी बोली जाती हैं।