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“दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
जब हीरा और मोती गया के घर पहुँचे, तो उनका मन विद्रोह से भरा हुआ था। वे झूरी के प्रति अटूट प्रेम रखते थे और उन्हें लगा कि उन्हें गया को बेचकर उनके साथ धोखा किया गया है। गया का व्यवहार भी प्रेमहीन और क्रूर था। पशु भी सम्मान और स्नेह की भाषा समझते हैं; जब उन्हें वह आत्मीयता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनीRead more
जब हीरा और मोती गया के घर पहुँचे, तो उनका मन विद्रोह से भरा हुआ था। वे झूरी के प्रति अटूट प्रेम रखते थे और उन्हें लगा कि उन्हें गया को बेचकर उनके साथ धोखा किया गया है। गया का व्यवहार भी प्रेमहीन और क्रूर था। पशु भी सम्मान और स्नेह की भाषा समझते हैं; जब उन्हें वह आत्मीयता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनी मूक भाषा में विरोध प्रकट किया। उन्होंने हल में पाँव न उठाने की कसम खा ली थी क्योंकि वे गया की अधीनता स्वीकार कर अपने स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते थे।
For more NCERT Solutions of Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 दो बैलों की कथा Question Answer (2026-27)
एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 1 दो बैलों की कथा समाधान – प्रश्न उत्तर, सारांश, महत्वपूर्ण प्रश्न तथा अभ्यास के प्रश्नों के हल – सत्र 2026-27 के अनुसार यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं।
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See less“जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया….” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
यद्यपि कहानी में स्वतंत्रता का स्वर मुखर है, किंतु बैलों की मूल प्रेरणा ‘अपनापन’ ही थी। वे गया के घर से इसलिए नहीं भागे कि वे काम नहीं करना चाहते थे, बल्कि इसलिए भागे क्योंकि उन्हें वहाँ परायापन और अपमान महसूस हुआ। झूरी के पास उन्हें सूखी घास भी मिलती थी, तो वे प्रसन्न रहते थे क्योंकि वहाँ उन्हें स्Read more
यद्यपि कहानी में स्वतंत्रता का स्वर मुखर है, किंतु बैलों की मूल प्रेरणा ‘अपनापन’ ही थी। वे गया के घर से इसलिए नहीं भागे कि वे काम नहीं करना चाहते थे, बल्कि इसलिए भागे क्योंकि उन्हें वहाँ परायापन और अपमान महसूस हुआ। झूरी के पास उन्हें सूखी घास भी मिलती थी, तो वे प्रसन्न रहते थे क्योंकि वहाँ उन्हें स्नेह मिलता था। अंत में भी वे काँजीहौस से भागकर किसी जंगल में नहीं गए, बल्कि वापस झूरी के थान पर आए। इससे सिद्ध होता है कि प्रेम और अपनेपन की तलाश ही उनके संघर्ष की मुख्य शक्ति थी।
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See less“उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
मालकिन और छोटी लड़की के व्यवहार में जमीन-आसमान का अंतर है। मालकिन बैलों को केवल काम करने वाली मशीन समझती थीं, इसलिए उनके भागकर आने पर उन्हें गुस्सा आया। इसके विपरीत, छोटी लड़की खुद माँ के वियोग का दुख झेल रही थी, इसलिए उसने बैलों की भूख और पीड़ा को अपनी पीड़ा समझा। वह उन्हें चुपके से रोटियाँ खिलातीRead more
मालकिन और छोटी लड़की के व्यवहार में जमीन-आसमान का अंतर है। मालकिन बैलों को केवल काम करने वाली मशीन समझती थीं, इसलिए उनके भागकर आने पर उन्हें गुस्सा आया। इसके विपरीत, छोटी लड़की खुद माँ के वियोग का दुख झेल रही थी, इसलिए उसने बैलों की भूख और पीड़ा को अपनी पीड़ा समझा। वह उन्हें चुपके से रोटियाँ खिलाती थी। जहाँ मालकिन का दृष्टिकोण अधिकारवादी और संकीर्ण था, वहीं छोटी लड़की का व्यवहार निस्वार्थ प्रेम और करुणा पर आधारित था। हालांकि, अंत में मालकिन का हृदय भी बैलों के घर लौटने पर स्नेह से भर गया और उन्होंने उनके माथे चूम लिए।
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See less“बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अच्छे मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
उनकी घनिष्ठता तीन प्रमुख घटनाओं से स्पष्ट होती है: प्रथम, नाँद में चारा खाते समय वे हमेशा एक साथ मुँह डालते और निकालते थे। द्वितीय, जब साँड़ ने हमला किया, तो दोनों ने मिलकर संगठित होकर उसे परास्त किया। तृतीय, काँजीहौस में जब हीरा को मोटी रस्सी से बाँध दिया गया, तो मोती उसे अकेला छोड़कर भाग सकता था,Read more
उनकी घनिष्ठता तीन प्रमुख घटनाओं से स्पष्ट होती है: प्रथम, नाँद में चारा खाते समय वे हमेशा एक साथ मुँह डालते और निकालते थे। द्वितीय, जब साँड़ ने हमला किया, तो दोनों ने मिलकर संगठित होकर उसे परास्त किया। तृतीय, काँजीहौस में जब हीरा को मोटी रस्सी से बाँध दिया गया, तो मोती उसे अकेला छोड़कर भाग सकता था, लेकिन वह भी वहीं रुक गया और अंत में दोनों साथ ही नीलाम हुए। ये घटनाएँ प्रमाणित करती हैं कि उनकी मित्रता केवल साथ रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे एक-दूसरे के लिए प्राण देने को तत्पर थे।
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See less“उसने उनके माथे सहलाए और बोली— खोल देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
बैलों की दुर्दशा देखकर मेरा हृदय भी द्रवित हो उठता। मैं केवल उन्हें रोटियाँ ही नहीं खिलाता, बल्कि उनके घावों पर तेल और मरहम भी लगाता। मैं उन्हें रात के अंधेरे में चुपके से खोल देता ताकि वे गया की क्रूरता से बच सकें। साथ ही, मैं यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता कि वे सही दिशा में भागें ताकि उन्हें दोRead more
बैलों की दुर्दशा देखकर मेरा हृदय भी द्रवित हो उठता। मैं केवल उन्हें रोटियाँ ही नहीं खिलाता, बल्कि उनके घावों पर तेल और मरहम भी लगाता। मैं उन्हें रात के अंधेरे में चुपके से खोल देता ताकि वे गया की क्रूरता से बच सकें। साथ ही, मैं यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता कि वे सही दिशा में भागें ताकि उन्हें दोबारा पकड़ा न जा सके। पशुओं के प्रति करुणा दिखाना ही सच्ची मानवता है। मैं उनके प्रति वैसा ही प्रेम भाव रखता जैसा झूरी रखता था, क्योंकि स्नेह की कमी ही उन्हें सबसे अधिक दुखी कर रही थी।
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