यह शीर्षक ताई के लिए सबसे सार्थक है क्योंकि वे एक भरे-पूरे समाज के बीच रहकर भी संवाद की कमी झेल रही हैं। उनके जीवन का मौन ही इस कहानी की मुख्य संवेदना और केंद्रबिंदु है।
कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है – ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
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‘संवादहीन’ शीर्षक ताई के जीवन की त्रासदी को बखूबी व्यक्त करता है। ताई एक बड़े घर में अकेली रहती हैं जहाँ भौतिक वस्तुएँ तो हैं, पर सुनने वाला कोई नहीं। मिट्ठू के आने से यह चुप्पी टूटी थी, लेकिन उसके चले जाने और गनपत द्वारा लाए गए ‘गूंगा’ तोता (नया तोता) ने उन्हें पुनः उसी संवादहीन स्थिति में धकेल दिया। ताई का अपनों से कटे रहना और फिर मिट्ठू से बिछड़ना, उन्हें समाज की सबसे बड़ी संवादहीनता का शिकार बनाता है।
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